बताया जाता है कि मैसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड की तरफ से गोरखपुर आईडीबीआई बैंक से 115.36 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। साथ ही 101.07 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दी गई। दोनों रकम 216.43 करोड़ रुपये बनती है। आईडीबीआई बैंक लिमिटेड की तरफ से ऋण वसूली के प्रयास भी किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 10 जून 2011 को मैसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड की तरफ से 20 करोड़ रुपये का एक बैंक खाता बंद करा दिया गया।
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नीलामी के लिए दस जुलाई 2019 को आईडीबीआई बैंक लिमिटेड की तरफ से समन जारी किया गया। बैंक ऋण के एक मामले में 1 जून 2019 तक 25,75,22744 रुपये (25 करोड़ 75 लाख 22 हजार 744 रुपये) की देनदारी बनी।
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इसे वसूलने के लिए सदर तहसील के लच्छीपुर गांव स्थित प्लाट नंबर 183, खाता नंबर 2777 की 0.290 हेक्टेयर और 0.871 हेक्टेयर भूमि की नीलामी होनी थी। लेकिन, नीलामी की प्रक्रिया नहीं हो पाई। अब चार साल बाद शुक्रवार को ईडी ने कार्रवाई कर दी।