मेडिकल कॉलेज परिसर में छह जुलाई को जो कार्यक्रम हुआ था, उसमें गोरखपुर-बस्ती मंडल के तमाम अफसर शामिल हुए थे। जो फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, उसके मुताबिक आरएमआरसी के साइंटिस्ट उद्घाटन समारोह में भीड़ के साथ दिख रहे हैं। तमाम अफसर आसपास खड़े हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग के निर्धारित मानक का पालन भी नहीं हुआ। सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठक में भी आरएमआरसी की टीम थी। अगर संक्रमण बढ़ा तो कई जिलों के प्रशासनिक, पुलिस और स्वास्थ्य महकमे के अफसर संक्रमण की चपेट में आएंगे। अब जरूरत सतर्कता बरतते हुए सबको कोरोना जांच कराने की है।
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बिना जांच ही सीएम के कार्यक्रम में पहुंचे
बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेड जोन में शामिल है, फिर भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। बिना जांच-पड़ताल कराए ही कोरोना जांच से जुड़े लोगों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने दिया गया। इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री के साथ कार्यक्रम में मौजूद एक अन्य डॉक्टर एक दिन पहले ही रेलवे अस्पताल के कोरोना वार्ड में संक्रमितों से मिलने पहुंच गए थे। वह पीपीई किट पहने थे। डॉक्टर ने संक्रमितों से मिलने की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इसी चिकित्सक ने मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य महकमे की तैयारियों का पूरा ब्योरा रखा था।
अब सवाल उठता है कि कोरोना वार्ड में जाने वाले चिकित्सक को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम तक कैसे जाने दिया गया। संबंधित चिकित्सक मरीजों से मिले थे, फिर भी न क्वारंटीन हुए और न ही कोरोना की जांच कराई। नियम है कि कोरोना वार्ड में जाने पर कम से कम दो दिन के लिए पैसीव क्वारंटीन होना पड़ेगा।
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वीडियो और फोटो की होगी समीक्षा
सीएम के कार्यक्रम के फोटो और वीडियो को देखा जा रहा है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि कार्यक्रम में आरएमआरसी के साइंटिस्ट और कमिश्नर के सहायक सीएम के नजदीक तो नहीं पहुंच गए। अगर वह सीएम से दो-तीन मीटर के क्षेत्र में रहेंगे तो डीएम को पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी। साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे। क्वालिटी कंसल्टेंट कोविड वार्ड में आरओ की मरम्मत कराने के लिए गए थे। उन्हें इसकी तस्वीर सोशल मीडिया में नहीं डालनी चाहिए थी।- डॉ श्रीकांत तिवारी, सीएमओ गोरखपुर