बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति विभाग के इमरजेंसी सहित दोनों वार्ड के सभी 118 बेड फुल हो गए हैं। स्थिति यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई मरीजों को लौटाना पड़ रहा है। वहीं, यदि कोई शिकायत कर रहा है तो उसे निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के पास 54-54 बेड के दो सामान्य वार्ड हैं। एक वार्ड नंबर-एक और दूसरा वार्ड नंबर-सात। दोनों ही वार्ड के सभी बेड फुल हो गए हैं। स्थिति यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के लिए बनाया गया नया वार्ड भी करीब 20 दिन पहले खोला गया है। इसमें 10 बेड का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये बेड भी खाली नहीं हैं।
सबसे खराब स्थिति इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की है। ऐसे मरीजों को बेड की स्थिति के बारे में बता दिया जा रहा है। एक सप्ताह से प्रसव कराने वाली महिला मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। प्रतिदिन औसतन 20 से 25 महिलाएं प्रसव के लिए आ रही हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सभी 100 प्रतिशत मरीजों का प्रसव कराया जा रहा है।
बेड थे फुल, जाना पड़ा निजी अस्पताल
दस नंबर बोरिंग की रहने वाली सुषमा को बृहस्पतिवार रात प्रसव पीड़ा हुई। उनका इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, इस कारण परिजन रात में उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर गए। भर्ती करने के लिए काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन डॉक्टर तैयार नहीं हुए। मजबूरी में निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मेडिसिन इमरजेंसी का भी बुरा हाल
मेडिसिन इमरजेंसी में भी मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। यह वार्ड भी 54 बेड का है, यहां भी मरीजों को भर्ती करने से मना करना पड़ रहा है। हर दिन 10 से 15 मरीज लौटाए जा रहे हैं। मेडिसिन इमरजेंसी के ही जिम्मे 10 बेड का आईसीयू भी है, जो इस वक्त खाली नहीं है। आईसीयू के मरीजों को बीआरडी से हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
बीआरडी में 1,750 बेड
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कुल 17 वार्ड चलते हैं। इन वार्डों में 1,750 बेड हैं। नेहरू अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेश राय ने बताया कि 90 फीसदी बेडों पर मरीज भर्ती हैं। इस वजह से नए मरीजों को भर्ती करने में दिक्कत हो रही है। 10 फीसदी बेड इमरजेंसी के मरीजों के लिए छोड़ा गया है। इमरजेंसी में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज आते हैं। कभी-कभी यह संख्या 100 तक पहुंच जाती है। गंभीर मरीजों को ही हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आने वाले सभी मरीजों का इलाज प्राथमिकता के किया जाता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज प्राथमिकता में हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने पर बेड के इंतजाम किए जाते हैं। इसके बाद भी अगर बेडों की कमी है तो दूर किया जाएगा।