इन दोनों संस्थानों में दो-दो ऑपरेशन थियेटर हैं। लेकिन, इन संस्थानों की ओटी से लेकर एनआईसीयू, पीडियाट्रिक आईसीयू की जांच पिछले डेढ़ साल से नहीं हुई है। इससे मरीजों को संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। संक्रमण की जांच के लिए बीआरडी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को केंद्र भी बनाया गया है। लेकिन, संस्थान माइक्रोबोयोलॉजी को सैंपल तक नहीं भेज रही है। न ही टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जांच के दौरान यह पता चलता है कि कहीं ओटी या फिर एसएनसीयू में बैक्टीरिया, फंगस तो नहीं पनप रहे हैं। अगर पनपते हैं तो इसे विसंक्रमित किया जाता है। इससे मरीजों को संक्रमण का खतरा नहीं होता है।
डेढ़ साल से नहीं हुई जांच
जिला अस्पताल के हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. मुकुल द्विवेदी ने बताया कि 19 फरवरी 2020 को ओटी में संक्रमण की जांच हुई थी। महिला अस्पताल के हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. कमलेश ने बताया कि वर्ष 2021 में जांच हुई थी। उसके बाद से आज तक सैंपल नहीं भेजा गया।
हाथ धुलें तो 50 फीसदी संक्रमण खत्म
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में संक्रमण का खतरा बैक्टीरीयल होता है। मरीजों में फंगल इंफेक्शन भी मिलते हैं। अगर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले ही साबुन से हाथ सही से धुलते हैं तो 50 फीसदी खतरा वहीं समाप्त हो जाता है। इसके बाद ऑपरेशन थियेटर में लोग ग्लबस का इस्तेमाल करें।