गोरखपुर जिले में कोरोना का प्रकोप कम होने के बाद डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया। बुधवार को मलेरिया के दो मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है। वहीं डेंगू के दो मरीजों के ठीक होने से विभाग ने थोेड़ी राहत भी महसूस की है। एक युवती का इलाज अभी चल रहा है।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि जनवरी से अब तक कुल 6880 मरीजों की जांच की गई है। इनमें दो लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। दोनों मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संक्रामक रोगों का समय है। बेहतर है कि लोग बचाव के प्रति सतर्क हो जाएं।
कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने से मलेरिया व डेंगू सहित अनेक संक्रामक बीमारियों से भी बचाव संभव है। इसलिए मास्क लगाएं, कुछ खाने-पीने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह धोएं। शारीरिक दूरी बनाकर रहें।
बाढ़ का पानी घटा तो बढ़ने लगा रोगों का प्रकोप
बाढ़ का पानी घटने के बाद अब गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को बाढ़ प्रभावित गांवों में बड़ी संख्या में मरीज मिल रहे हैं। बीमार होने वालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा अधिक पाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की 16 टीमों ने बुधवार को छह तहसीलों के 12 गांवों में स्वास्थ्य जांच, उपचार सेवाएं दीं। टीमों ने 1682 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज किया। बीमारों में सर्वाधिक 1020 महिलाएं थीं। 662 पुरुष, 90 बच्चे, आठ गर्भवती, 154 बुजुर्ग और सात दिव्यांग शामिल रहे। मरीजों में सबसे ज्यादा समस्या त्वचा संबंधी शिकायतों की मिली। 701 लोग दाने, चकत्ते, रेशेज, खुजली आदि त्वचा रोगों से पीड़ित थे। गंभीर त्वचा रोग से पीड़ित कुछ मरीजों के पैर व अन्य अंगों में सड़न की शिकायत वाले पाए गए चिकित्सकों ने उन्हें भी दवा दी। सर्दी, जुकाम, बुखार के 84, उल्टी-दस्त के 62 और अन्य बीमारियों के 835 मरीज मिले। टीम ने 21,062 क्लोरीन गोलियां बांटीं। उल्टी-दस्त से जूझ रहे मरीजों को 2019 ओआरएस पैकेट दिए गए। 1352 हैंडपंप का क्लोरिनेशन किया गया।