कर्ज और गृह कलह में पहले खत्म हुईं हैं जिंदगियां
गृह कलह और कर्ज में में पहले भी कई जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं। आत्मघाती कदम उठाने के साथ ही परिवार की हत्या करने के बाद खुदकुशी की कई घटनाएं हुई हैं। मनोचिकित्सक इसकी वजह अवसाद बताते हैं तो समाजशास्त्री एकल परिवार को जिम्मेदार बताते हैं।
08 दिसंबर 2015 : खोराबार के पोछिया ब्रह्मस्थान केवटान टोला निवासी दिलीप निषाद ने पत्नी माया और दस माह के बच्चे लकी की हत्या की और फिर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।
08 मई 2018 : खोराबार के झारखंडी निवासी शशि सिंह ने बेटी दीक्षा उर्फ एंजन और बेटे नववैध का गला दबाकर हत्या कर दी थी। फिर फंदा लगाकर खुदकुशी की। पति संतोष पहले ही खुदकुशी कर चुका था।
04 फरवरी 2019: राजघाट निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता ने पत्नी सरिता, बेटी रचना, पायल व छोटे बेटे आयुष को खाने में जहर देकर हत्या की थी। फिर खुद ट्रेन के सामने कूदकर उसने खुदकुशी की थी।
06 मई 2020: पिपराइच के उनौला स्टेशन के पास पूजा तीन बेटियों संग ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी की थी।
22 अक्तूबर 2021: खोराबर के भैसहा निवासी मंजू बेटे अनूप व बेटी अमृता के साथ आग लगा ली थी। बच्चों की मौतत्हेा गई थी।
07 सितंबर 2017 : शाहपुर के शक्तिनगर में शोभा अपनी बड़ी बेटी एंजन, बेटे अर्थव और आराध्या के साथ पंखे से लटक गई थी। इस मामले में शोभा व उसकी बड़ी बेटी की मौत हो गई थी।
09 दिसंबर 2022: पिपराइच के जंगल धूसड़ में विवेकानंद दूबे ने पत्नी मालती के साथ खुदकुशी कर ली थी। कमरे में पत्नी और बाहर पति का शव मिला।
16 नवंबर 2022: शाहपुर में जितेंद्र श्रीवास्तव ने बेटी मान्या और मानवी के साथ खुदकुशी की थी। बेटियों के शव पंखे के सहारे लटका था।
16 नवंबर 2022 : गोरखनाथ में मां सरोज देवी और बेटे मनीष राय ने खुदकुशी की थी। दोनों ने जहर खाकर जान दी थी।
7 फरवरी 2023 : गोला के देवकली गांव में सूदखोरों से परेशान होकर इंद्र बहादुर मौर्य ने पत्नी सुशीला, बेटी चांदनी और अर्श को जिंदा जला दिया था और फिर खुदकुशी कर ली थी।