जांच हुई तो सच जानकर अफसर भी सन्न
वर्ष 2010 में लखनऊ के एक अफसर की पत्नी गर्भवती थीं, जिन्हें डॉक्टर ने सुरक्षित प्रसव के लिए एक महंगा इंजेक्शन लगवाने का सुझाव दिया। ढाई हजार रुपये के इस इंजेक्शन की तीन डोज महिला को लगाई गई, इसके बाद भी उनका गर्भपात हो गया।
अफसर और डॉक्टर ने इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी से संपर्क किया तो पता लगा कि जिस इंजेक्शन की बात हो रही है, उसका उत्पादन कंपनी दो साल पहले ही बंद कर चुकी है। इसके बाद इस मामले में अवैध बिक्री व भंडारण के आरोप में लखनऊ और गोरखपुर से पांच लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि गोरखपुर में नकली दवाओं के धंधे की कोई जानकारी नहीं है। हर महीने दुकानों से 15 सैंपल लिए जाते हैं। इनकी जांच रिपोर्ट भी आती है। जिले में नकली दवाओं के धंधे पर रोक लगाने के लिए लगातार जांच होती रहती है। फिलहाल गोरखपुर में कोई विशेष जांच कराने की योजना नहीं है।
आयुर्वेद की 22 दवाओं में एलोपैथ का मिश्रण, 10 दवाएं नकली
आयुर्वेद में भी नकली और मिलावटी दवाओं का धंधा बढ़ने लगा है। प्रदेश में 10 ऐसी दवाएं चिह्नित हुई हैं, जो जांच में निकली पाई गई हैं। इसके अलावा 22 ऐसी दवाएं भी हैं, जिनमें एलोपैथ के रसायनों का मिश्रण है। ये दवाएं हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश में बनाई जा रही हैं। यूपी के आयुर्वेद निदेशालय ने ऐसी दवाओं के प्रदेश में भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।
निदेशक डॉ. पीसी सक्सेना की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लिए गए दवाओं के सैंपल, आम लोगों की शिकायत व अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के बाद संदिग्ध बताए गए सैंपलों की प्रयोगशाला में विधिवत जांच कराई गई।
इस जांच के आधार दवाओं में मिश्रित केमिकल की पहचान की गई है। जिन 22 दवाओं में ऐलोपैथ के मिश्रण पाए गए हैं, उनमें से अधिकांश एलर्जी, बुखार, दर्द, शक्तिवर्द्धक और पेट से संबंधित हैं। इसके अलावा 10 दवाओं के नमूने जांच में फेल हो गए हैं। इनमें दाद-खाज खुजली, शक्तिवर्द्धक और पेट से संबंधित हैं। जो दवाएं नकली व अपमिश्रित पाई गई हैं, उन सभी को जन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। इसलिए इसके प्रदेश में बिक्री, परिवहन, भंडारण को प्रतिबंधित करते हुए निगरानी का निर्देश दिया गया है।