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संतकबीरनगर: सवालों के घेरे में पुलिस, दस पर हो चुकी है निलंबन की कार्रवाई, जानिए क्या है पूरा मामला

Fri, 30 Jul 2021 02:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरगनर।

सार

पुलिस के लिए दो दिन मशक्कत भरा गुजरा। आरोपी दरोगा के अपहरण की गलत सूचना देने पर भी हुई कार्रवाई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले की पुलिस के लिए बीते दो दिन भारी गुजरे। अपनी करतूतों से पुलिस सवालों के घेरे में आ गई। इसकी वजह से एसपी को कड़ा निर्णय लेना पड़ा। 
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वैसे तो अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण को लेकर एडीजी, आईजी और एसपी के स्तर से मातहतों को आए दिन पाठ पढ़ाया जाता है। पुलिस की छवि धूमिल न हो और हर छोटी-बड़ी सूचना पुलिस तक समय से पहुंचे, इसके लिए मित्र पुलिसिंग पर भी जोर रहता है। 

इधर, दो दिन पुलिस के लिए काफी मशक्कत भरे गुजरे। धनघटा में एसआई राम मिलन यादव को एंटी करप्शन की टीम ने दस हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा। जैसे ही टीम आरोपी दरोगा को लेकर खलीलाबाद की ओर बढ़ी, वैसे ही धनघटा में तैनात एक दरोगा ने आरोपी दरोगा के अपहरण की गलत सूचना महुली पुलिस को दे दी। 
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इधर, सूचना पर महुली थाने के पुलिस चौकी मुखलिसपुर और नाथनगर में पुलिस ने बैरिकेडिंग करके एंटी करप्शन टीम को रोका और नोकझोंक भी हुई। बाद में परिचय पत्र दिखाने के बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी दरोगा को लेकर खलीलाबाद जा पाई। इस मामले में रिक्रूट कांस्टेबल अजीत पासवान, सत्येंद्र सिंह, रवि  चौरसिया, हेड कांस्टेबल जगदंबा तिवारी, अमरेंद्र सिंह बघेल और कांस्टेबल राजकिशोर के खिलाफ साजिश के तहत पकड़े गए आरोपी दरोगा को छुड़ाने की कोशिश करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और हमलावर होने आदि धाराओं में महुली थाने में केस दर्ज हुआ। 
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इन छह पुलिस कर्मियों के अलावा धनघटा के एसएसआई हरिकेश भारती और पौली चौकी प्रभारी मनोज पटेल भी निलंबित कर दिए हैं। जबकि रिश्वत में जेल भेजे गए दरोगा राम मिलन यादव भी निलंबित हुए। अब सवाल है कि रिश्वत में एंटी करप्शन की टीम ने दरोगा राम मिलन यादव को पकड़ा और ले जा रही थी। ऐसे में अपहरण की यदि घटना होती तो पूरे रेंज को जानकारी हो जाती है और पुलिस जगह-जगह नाकेबंदी करती। 

खास कर धनघटा थाने की पुलिस भी पीछा करती, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यदि अपहरण की अफवाह नहीं फैलाई गई होती तो शायद दो जगह पुलिस कर्मी एंटी करप्शन टीम को नहीं रोकते और हुई कार्रवाई से बच जाते। 

दूसरी घटना बखिरा थाने की है। पुलिस की अभिरक्षा में शिवबखरी गांव निवासी बहरैची की पिटाई से मौत होने का आरोप लगा है। इस मामले में एसओ मनोज सिंह समेत सात नामजद और अन्य पुलिस कर्मी आरोपी बनाए गए हैं। 

नियम है कि 24 घंटे से अधिक समय तक किसी को अभिरक्षा में पुलिस नहीं रख सकती है। ऐसे में बिना केस दर्ज के ही तीन दिनों तक पुलिस क्यों बहरैची को थाने में रोके रखा। उसकी मौत हुई तो बवाल मचा। एसओ मनोज सिंह निलंबित कर दिए गए। 

आईजी अनिल राय ने बताया कि रिश्वत में पकड़े गए दरोगा के अपहरण की झूठी सूचना फैलाई गई। यह काम धनघटा थाने के एक दरोगा ने किया। इसमें जो भी दोषी थे, उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। बखिरा प्रकरण में दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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