उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले की पुलिस के लिए बीते दो दिन भारी गुजरे। अपनी करतूतों से पुलिस सवालों के घेरे में आ गई। इसकी वजह से एसपी को कड़ा निर्णय लेना पड़ा।
वैसे तो अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण को लेकर एडीजी, आईजी और एसपी के स्तर से मातहतों को आए दिन पाठ पढ़ाया जाता है। पुलिस की छवि धूमिल न हो और हर छोटी-बड़ी सूचना पुलिस तक समय से पहुंचे, इसके लिए मित्र पुलिसिंग पर भी जोर रहता है।
इधर, दो दिन पुलिस के लिए काफी मशक्कत भरे गुजरे। धनघटा में एसआई राम मिलन यादव को एंटी करप्शन की टीम ने दस हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा। जैसे ही टीम आरोपी दरोगा को लेकर खलीलाबाद की ओर बढ़ी, वैसे ही धनघटा में तैनात एक दरोगा ने आरोपी दरोगा के अपहरण की गलत सूचना महुली पुलिस को दे दी।
इधर, सूचना पर महुली थाने के पुलिस चौकी मुखलिसपुर और नाथनगर में पुलिस ने बैरिकेडिंग करके एंटी करप्शन टीम को रोका और नोकझोंक भी हुई। बाद में परिचय पत्र दिखाने के बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी दरोगा को लेकर खलीलाबाद जा पाई। इस मामले में रिक्रूट कांस्टेबल अजीत पासवान, सत्येंद्र सिंह, रवि चौरसिया, हेड कांस्टेबल जगदंबा तिवारी, अमरेंद्र सिंह बघेल और कांस्टेबल राजकिशोर के खिलाफ साजिश के तहत पकड़े गए आरोपी दरोगा को छुड़ाने की कोशिश करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और हमलावर होने आदि धाराओं में महुली थाने में केस दर्ज हुआ।