ढाई लाख की आबादी पर एक टीबी यूनिट
सीएमओ ने बताया कि ढाई लाख से पांच लाख की आबादी पर एक टीबी यूनिट है और पचास हजार से एक लाख की आबादी पर एक डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया गया है। टीबी की समस्त जांच और दवाएं राजकीय चिकित्सालयों में मुफ्त होती हैं। अगर कोई प्राइवेट चिकित्सक भी अपने मरीजों की सरकारी अस्पताल में निशुल्क जांच करवाना चाहता है तो करा सकता है।
नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी अंग में भी हो सकती है टीबी
सीएमओ ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक की खांसी से टीबी हो सकती है, मगर प्रत्येक खांसी टीबी नहीं होती है। अगर यह दिक्कत है तो टीबी की जांच अवश्य कराएं। शरीर में टीबी मुख्यतया फेफड़ों को ही प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी टीबी होती है। नाखून और बाल को छोड़ कर शरीर के किसी भी अंग में टीबी हो सकती है।
ऐसी टीबी एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहलाती है और इसकी पहचान विशेषज्ञ ही करते हैं। गैर फेफड़े वाले टीबी के मरीज तो संक्रमण नहीं फैलाते, लेकिन फेफड़े में टीबी का मरीज अगर उपचार नहीं कराता है तो साल भर में 10 से 15 लोगों को मरीज बना सकता है। हर तीन मिनट में टीबी के दो मरीजों की मृत्यु हो जाती है। भारत में प्रत्येक एक लाख की आबादी पर 192 टीबी के मरीज वर्ष 2020 में पाए गए।