उन्होंने बताया कि इसमें पशुओं को टैग लगाने के बाद उसके मालिक का नाम, जानवर का प्रकार, कब-कब उसे टीके लगाए गए हैं, उसका कृत्रिम गर्भाधान हुआ है कि नहीं सहित अन्य जानकारी पोर्टल में लोड की जाती है। पोर्टल में यूआइएन नंबर लोड करते ही देश के किसी भी कोने से पशु के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। इससे जो लोग पशु की खरीदारी करते हैं उसे भी पशु के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी।
उन्होंने बताया कि पशुओं के कान से यदि को टैग नंबर को निकाल देता है या तोड़ देता है तो उसे फिर से नहीं लगाया जा सकता। उसकी जगह दूसरा टैग नंबर जारी किया जाएगा। प्रथम चरण में केवल गाय और भैंस का ही टैग नंबर जारी किया जा रहा है।
अब बैल व सांड़ का भी टैग नंबर जारी करना शुरू कर दिया गया है। इसके लिए पशुपालकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। सरकार की तरफ से प्रति पशु टीकाकरण के लिए 3.50 रुपये एवं टैगिंग के लिए 2.50 रुपये मानदेय के रूप में दिया जाता है।