पूछने पर बताया गया कि जब तक उन्हें भर्ती नहीं किया जाएगा कोई जांच नहीं की जाएगी। इसके बाद वह फिर एसआईसी से मिले, उन्हें फिर मेडिसिन वार्ड की इमरजेंसी भेजा गया और वहां से वही जवाब मिला। करीब चार घंटा इधर-उधर भटकने के बाद बिना जांच कराए ही वह मेडिकल कॉलेज से बाहर निकल आए। विजय कुमार शाही ने बताया कि उन्होंने बेतियाहाता स्थित एक निजी अस्पताल में जांच कराई।
गोरखपुर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि श्रवण कुमार के परिजनों और बीमारी के दौरान उनके साथ रहने वाले लोगों को टेमीफ्लू दवा खिलाई जा रही है। विजय शाही भी उनमें से एक हैं। सर्दी जुकाम की शिकायत होने पर उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिलने पर उन्हें कोई समस्या होने पर तुरंत मेडिकल कॉलेज आने की सलाह देकर भेज दिया गया। सीएचसी की टीम उनकी निगरानी करेगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधान चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. जीसी श्रीवास्तव ने कहा कि विजय शाही ओपीडी बंद होने के एक घंटे के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। मैं खुद उन्हें अपने साथ लेकर विशेषज्ञ चिकित्सक के पास गया और उनकी जांच कराई थी। स्वाइन फ्लू के लक्षण कई स्टेज में सामने आते हैं, जांच में उनमें स्वाइन फ्लू के खास लक्षण नहीं दिखे, इसीलिए उन्हें एडमिट नहीं किया गया। तबीयत खराब होने पर तुरंत मेडिकल कॉलेज आने की सलाह देकर उन्हें घर भेज दिया गया।
मेडिकल कॉलेज में छह बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार
जिले में स्वाइन फ्लू के दस्तक देते ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में संक्रमित मरीजोें को अलग रखने के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वार्ड नंबर छह के पड़ोस में स्थित कमरे को आईसोलेशन वार्ड के रूप में विकसित किया गया है। आइसोलेशन वार्ड में छह बेड सहित अन्य जरूरी उपकरण लगा दिए गए हैं मंगलवार से यह मरीजों को भर्ती करने के लिए तैयार रहेगा।