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Gorakhpur: देश के 26 सूर्यकुंडों में से एक है गोरखपुर में स्थित सूर्यकुंड, भगवान राम ने किया था विश्राम

Tue, 18 Apr 2023 02:12 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

सूर्यकुंड धाम 26 ऐतिहासिक और पौराणिक सूर्यकुंड धामों में से एक है। दिल्ली, हरियाणा, यमुनोत्री, बहराइच, बिहार, अयोध्या के अलावा गोरखपुर के सूर्यकुंड में ही ऐसा कुंड है। मान्यता है कि इसका पानी कभी नहीं सूखता।
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सूर्यकुंड में धूमधाम से मनाया जाता है छठ और दीपावली। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सूर्यकुंड धाम शहर के प्राचीन धरोहरों में से एक है। देश के 26 पौराणिक सूर्यकुंडों में शहर में स्थित सूर्यकुंड भी एक है। मान्यता है कि 1458 में राजा मानसिंह ने भगवान सूर्य और अन्य देवी-देवताओं की उपासना के लिए इस सूर्यकुंड का निर्माण कराया था। जो अब सूर्यकुंड धाम के मना से विख्यात है।

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अगर बात की जाए पौराणिक मान्यता की तो भगवान श्रीराम ने राज्य भ्रमण के दौरान सूर्यकुंड में विश्राम किया था। अगले दिन सुबह उन्होंने सरोवर में स्नान कर एक पिंड बनाया और सूर्यदेव का आह्वान किया। सूर्यदेव प्रकट हुए तो श्रीराम ने उन्हें दीपदान किया। इसी वजह से इस सरोवर का नाम सूर्यकुंड सरोवर हो गया। तभी से यहां हर वर्ष दीपावली के अगले दिन दीपोत्सव की परंपरा चली आ रही है।

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मान्यता: कभी नहीं सूखता पानी
सूर्यकुंड धाम 26 ऐतिहासिक और पौराणिक सूर्यकुंड धामों में से एक है। दिल्ली, हरियाणा, यमुनोत्री, बहराइच, बिहार, अयोध्या के अलावा गोरखपुर के सूर्यकुंड में ही ऐसा कुंड है। मान्यता है कि इसका पानी कभी नहीं सूखता। सूर्यकुंड का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में ‘कारुपथ’ के रूप में मिलता है। मान्यता है कि महाभारत काल में इसे गोपालक के नाम से जाना जाता था। यहां दीपोत्सव से विशेष पुण्यलाभ मिलता है। भगवान सूर्य श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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लगभग तीन करोड़ रुपये से हुआ है सौंदर्यीकरण

पर्यटन विभाग ने लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से सूर्यकुंड धाम का सौंदर्यीकरण कराया है। इससे यहां आरसीसी रिटेनिंग वॉल, आरसीसी चार दीवारी, लाल स्टोन और एमएस गेट, बैठने के बेंच, सोलर लाइट, लैंडस्कैपिंग टूरिस्ट शेल्टर का जीर्णोद्धार, कॉन्सेप्ट बेस्ड स्टोन पिलर्स, यूरिनल्स, कैंपस ड्रेन, पाथवे एंड साइनेज कार्य किए गए हैं।

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दीपावली के अगले दिन होता है दीपोत्सव

पौराणिक परंपरा के अनुसार दीपावली के अगले दिन सूर्यकुंड धाम पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है। संस्कार भारती के पदाधिकारी 30 हजार से अधिक दीयों से इस घाट को दीपावली के अगले दिन रोशन करते हैं। इसके साथ सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से हर सप्ताह यहां श्रमदान का कार्यक्रम आयोजित होता है।

इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित होकर सरोवर और धाम परिसर की सफाई करते हैं। इसके साथ ही सूर्यकुंड धाम जीर्णोंद्धार समिति की ओर से सरोवर पर साप्ताहिक गंगा आरती का भी आयोजन किया जाता है।
 
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