दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दिन बढ़ाने के उद्देश्य से निर्धारित 52 दिन के अवकाश को घटाकर 29 दिन करने की तैयारी की जा रही है ताकि शैक्षणिक सत्र में 180 दिन कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। वहीं प्रत्येक सेमेस्टर में 90 दिन शिक्षण कार्य दिवस सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्य शुरू कर दिया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया गया है। इसे सुनिश्चित करने के लिए अधिक शैक्षणिक कार्य दिवस की आवश्यकता है जिसमें शिक्षण के साथ शैक्षणिक और खेलकूद की गतिविधियों को विश्वविद्यालय में संचालित किया जा सके। इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मिड-सेमेस्टर की परीक्षाओं को समाप्त कर दिया। मिड सेमेस्टर परीक्षाएं कराने में 21 दिन लगता था। ऐसे में मिड और एंड टर्म की सेमेस्टर परीक्षाएं कराने में शैक्षणिक सत्र में करीब 40 दिन लगते थे जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित होता था। इसके साथ ही गोरखपुर विश्वविद्यालय छुट्टियों को भी तार्किक करने जा रहा है और अनावश्यक अवकाश समाप्त करने पर विचार कर रहा है।
यूजीसी के अनुसार एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम 180 दिन शिक्षण कार्य होने चाहिए। प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में गोरखपुर विश्वविद्यालय में सबसे अधिक 52 दिन का अवकाश तय है। जबकि राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सिर्फ 29 दिन अवकाश होना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय में वर्तमान सत्र में 29 दिन ही अवकाश होता है। ऐसे में अवकाश की सूची को तर्कसंगत बनाया जा रहा है, जिससे छात्रों को कम से कम एक सेमेस्टर में 90 शिक्षण कार्य दिवस मिलना सुनिश्चित हो। ताकि पाठ्यक्रम समय से पूरा किया जा सके, विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए गतिविधियों को संचालित करने का अवसर मिले तथा परीक्षा कराकर परिणाम समय से घोषित किए जा सके।