अगस्त 1990 का वह दौर, जब आरक्षण को लेकर मंडल कमीशन की रिपोर्ट को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह संसद में लागू करने की घोषणा कर दी तो पूरा देश हिंसा की आग में झुलसने लगा। उस वक्त गोरखपुर में भी हजारों नौजवानों का रेला सड़को पर आ गया था। बड़हलगंज में आरक्षण विरोधी गुट और पुलिस में झड़प हुई, पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी। जिसमें नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के छात्र निर्भिकार त्रिपाठी को गोलियां लगी और उनकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद गोरखपुर में आंदोलन ने गति पकड़ी। गोरखपुर में 11वीं के छात्र हेमंत राय ने खुद को आग लगा लिया। 90 फीसदी वह जल गया, बाद में उनकी मौत हो गई। इसी बीच शहर में अलहदादपुर छात्र राजेश त्रिपाठी ने आरक्षण के विरोध में खुदकुशी कर ली।
सवर्ण आर्मी लिबरेशन फ्रंट का गठन हुआ
राजेश (वर्तमान में माफिया एवं पूर्व विधायक राजन तिवारी के बड़े भाई) की मौत के बाद सवर्ण आर्मी लिबरेशन फ्रंट का गठन हुआ। इस संगठन ने हिंसा का सहारा लिया। आरटीओ, समाज कल्याण सहित कई विभागों में आग लगा दी। लेकिन जब इसके लोगों ने केंद्रीय मंत्री महाबीर प्रसाद के घर मे बम फेंक दिया तो इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी।
आंदोलन के अगुवा दिनेश चंद्र त्रिपाठी और संजय त्रिपाठी बताते हैं, पूर्वांचल का केंद्र बिंदु गोरखपुर हो गया था। हम लोगों ने हर मोर्चा पर विरोध किया। यहां तक कि पश्चिमी यूपी तक बैठकों में गए। नौजवान सड़कों पर थे, आंदोलन को चलाने के साथ उनकी सलामती की जिम्मेदारी भी हमारी थी। हालांकि कई गुट आंदोलन को धार देने के लिए लगे थे। बाद में सबको एक कर स्वर्ण मोर्चा बना। इसके सदस्य पार्कों में छिप कर योजना बनाते थे।
पांच पर लगा गैंगेस्टर
हिंसक घटनाओं के बाद आरक्षण आंदोलन में सक्रिय गोविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दिनेश चंद्र त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी, संजय त्रिपाठी, राजेश त्रिपाठी और अजय शंकर त्रिपाठी पर जिला प्रशासन ने गैंगेस्टर की कार्यवाही की।