फर्जी दस्तावेज की मदद से शिक्षक की नौकरी करने वाले युवक को एसटीएफ ने दबोच लिया है। जांच में पता चला कि 2015 से वह बतौर सहायक अध्यापक नौकरी कर रहा है। देवरिया के दो लोगों ने पांच लाख रुपये लेकर उसे नौकरी दिलाई थी। एसटीएफ आरोपित से पूछताछ कर अन्य जानकारियां जुटा रही है।
पकड़े गए आरोपित की पहचान देवरिया जिले के भाटपाररानी के कुईचबर निवासी बृजकिशोर यादव उर्फ भोला पुत्र रामचंद्र यादव के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्ति पर एसटीएफ कार्रवाई कर रही है। सूचना मिली थी कि कुईचबर निवासी राकेश सिंह और अश्वनी श्रीवास्तव संगठित गिरोह बनाकर रुपये लेकर फर्जी अंक पत्र आदि दस्तावेज तैयार कर अध्यापक के पद पर फर्जी तरीके से नियुक्ति कराते हैं। इसी क्रम में पता चला कि इन दो लोगों ने मिलकर अपने गांव के बृजकिशोर यादव को नौकरी दिलाई है।
वह माध्यमिक विद्यालय बघाड़ी ब्लाक डुमरियागंज सिद्धार्थनगर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत है। बेसिक शिक्षा अधिकारी सिद्धार्थनगर ने पात्रता परीक्षा का अंकपत्र फर्जी पाए जाने के बाद उसे बर्खास्त कर दिया है। सोमवार को मुखबिर ने बताया कि फर्जी शिक्षक बृजकिशोर रेलवे बस स्टैंड पर आने वाला है। सूचना पर एसटीएफ टीम पहुंच गई और फिर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपित ने बताया है कि उसने सन 2000 में हाईस्कूल और 2003 में देवरिया से इंटर पास किया था। उसके गांव के राकेश सिंह व उनके सहयोगी अश्वनी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और पांच लाख रुपये लेकर नौकरी दिलाई थी। 2015 में उसकी नौकरी लगी थी। आरोपित को कैंट पुलिस के हवाले किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।