डॉ. कुणाल सिंह ने बताया कि 150 से अधिक मरीजों को पेसमेकर लगाया गया जा चुका है। इसमें 25 से 30 फीसदी मरीज ऐसे थे, जो गुल मंजन के सेवन के साथ तंबाकू का भी इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा 15 से 20 फीसदी मरीजों को एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी है।
जांच में पता चला कि गुल मंजन से इनके हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, मांसपेशियों के दीवारों की मोटाई, बड़े पैमाने पर मांसपेशियों का बढ़ना और सिकुड़ना शामिल था। इसके कारण हृदय के पंप करने की शक्ति कम हो गई। इसे डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। इसके मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
स्टेमी केयर नेटवर्क से रुकेगा हार्ट अटैक
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि प्रदेश में हार्ट अटैक से मौत के मामले पिछले कुछ सालों से तेजी से बढ़े हैं। इन मौतों का रोकने के लिए प्रदेश में स्टेमी केयर नेटवर्क की स्थापना की जाएगी। इस नेटवर्क में देश भर के हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन 26 और 27 मई को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में होगा। इसमें दिल्ली एम्स, ऋषिकेश एम्स, एसजीपीजीआई, केजीएमयू के हृदय रोग विशेषज्ञ मौत की वजह और उससे बचाव का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन कर सभी से जानकारी साझा की जाएगी।