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रियल टाइम खतौनी: मुसीबतों से बचना है तो रखें ख्याल, जमीन की करा लें तगड़ी पड़ताल

Fri, 26 May 2023 04:14 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

तहसील के अधिकारियों का कहना है कि रियल टाइम खतौनी के लिए नए सिरे से नक्शा तैयार होगा। इसमें भूमि के हर टुकड़े की जानकारी दर्ज होगी। खतौनी, खेत के गाटा संख्या के आधार पर तैयार होगी। इसमें भूमि की प्रकृति अथवा अंश का जिक्र किया जाएगा।
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गोरखपुर कचहरी - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शासन के निर्देश पर रियल टाइम (वास्तविक समय) खतौनी जारी किए जाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। तहसीलों में वर्तमान खतौनी को अपडेट किया जा रहा है। नई व्यवस्था से भूमि विवादों पर अंकुश तो लगेगा, लेकिन नई व्यवस्था में कुछ झोल भी है। एक ही जमीन कई लोगों को बेचे जाने समेत अन्य दुरुपयोग की आशंका है।

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अधिकारियों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां बरत कर किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। मसलन खरीदारी से पहले जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों का मुआयना जरूर करा लें, जिससे बैनामा की प्रक्रिया के बाद कोई पेंच न फंसे। बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ अधिवक्ताओं के जरिए जमीन का बैनामा कराई जाए, भले इसके लिए थोड़ी फीस ही क्यों न अदा करनी पड़े।

शासन की ओर से भूमि विवादों को खत्म करने के लिए रियल टाइम खतौनी दी जाएगी। बैनामा कराते ही खरीदार को जमीन की खतौनी मिल जाएगी। नई खतौनी को आधार और पैन कार्ड से भी जोड़ा जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि बैनामा होते ही क्रेता और विक्रेता दोनों के मोबाइल नंबर पर बैंक की तरह मैसेज पहुंच जाएगा जिससे वह अलर्ट हो जाएगा।
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पुरानी खतौनी में किसी भूमि के नामांतरण के बाद दाएं कालम में आदेश दर्ज होता था। बाएं स्थित मुख्य कालम में नाम चढ़वाया जाता है। इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।

नई प्रक्रिया में क्रेता का नाम सीधे मुख्य कालम में दर्ज होगा। नई खतौनी में 19 बिंदू शामिल हैं, जबकि पुरानी खतौनी में 13 थे। नए बिंदु में आधार नंबर/ पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, जाति, गाटा का यूनिक कोड, हर खातेदार का अंश इत्यादि का जिक्र होगा। रियल टाइम खतौनी की भाषा भी सरल होगी। उर्दू की जगह ज्यादातर हिन्दी का इस्तेमाल होगा।

 

रियल टाइम खतौनी के फायदे

सदर तहसील परिसर में खतौनी लेने के लिए लगी लोगों की लाइन - फोटो : अमर उजाला।
तहसील के अधिकारियों का कहना है कि रियल टाइम खतौनी के लिए नए सिरे से नक्शा तैयार होगा। इसमें भूमि के हर टुकड़े की जानकारी दर्ज होगी। खतौनी, खेत के गाटा संख्या के आधार पर तैयार होगी। इसमें भूमि की प्रकृति अथवा अंश का जिक्र किया जाएगा। भूमि के संबंध में सीलिंग, संक्रमणीय, असंक्रमणीय, पट्टेदार, नवीन परती, आबादी, रास्ता अथवा चकरोड की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

खातेदार का अंश स्पष्ट होने से अलग से हिस्सा प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भूमि के साथ पुश्तैनी मकान और अन्य अचल संपत्तियों का ब्यौरा होगा। इसमें हर गाटा का एक यूनिक कोड होगा। राजस्व न्यायालयों में चल रहे भूमि के विवादों की जानकारी मिल सकेगी। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने, लोन के दस्तावेज तैयार कराने में सुविधा होगी। रियल टाइम खतौनी में भूमि मालिक की जाति के कोड का उल्लेख होगा। अलग से जाति प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी।

डीएम, एसडीएम के आदेश पर होगा सुधार
रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की लिपिकीय त्रुटि को ठीक कराने के लिए डीएम अथवा एसडीएम के आदेश की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए क्रेता को आवेदन करना होगा। संबंधित अधिकारी इसका परीक्षण करके आदेश जारी करेंगे। इसके बाद ही संशोधन हो सकेगा। खतौनी में अक्सर नाम, पति का नाम, पिता का नाम, गाटा संख्या सहित अन्य गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी दशा में लंबी प्रक्रिया होगी। वहीं फर्जी बैनामा कराए जाने पर खतौनी निरस्त कराने के लिए पहले की तरह मुकदमा करना पड़ेगा। इसमें काफी वक्त गुजर जाएगा।

 

जमीन का मुआयना जरूरी

गोरखपुर कचहरी। - फोटो : अमर उजाला।
प्रथम उप निबंधक धीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि रियल टाइम खतौनी में जमीन खरीदते ही लोग मालिक बन जाएंगे। किसी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जमीन खरीदने के पहले उसका मुआयना जरूर करा लें। अच्छे अधिवक्ताओं से राय लें। बिचौलियों पर किसी तरह का भरोसा न करें। दस्तावेज लिखे जाने के दौरान भी उसकी पूरी जानकारी लें।

गड़बड़ी हुई तो सुधार नहीं होगा
अधिवक्ता जयराम वर्मा ने कहा कि रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसमें संशोधन नहीं हो सकेगा। इससे पूरक बैनामा कराने का समय नहीं मिलेगा। मसलन, किसी बैनामे के दौरान गाटा नंबर या चौहद्दी इत्यादि में गड़बड़ी हो जाती है तो पूरक बैनामा कराकर उसे सुधार लिया जाता है।

बंटवारा न होने पर दिक्कतें
अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कहा कि यदि किसी भूमि का बंटवारा नहीं हुआ है। उसका रकबा टूटा नहीं है। तो उसकी चौहद्दी तय करने में कठिनाई होगी। यदि सहखातेदार ने कोई आपत्ति करते हुए वाद दाखिल कर दिया तो इसमें स्थगन आदेश जारी हो सकता है। इससे पीड़ितों को कचहरी का चक्कर लगाने ही पड़ेंगे।

 
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भुगतान में गड़बड़ी करेंगी परेशान

गोरखपुर कचहरी। - फोटो : अमर उजाला।
अधिवक्ता संजय चौरसिया ने कहा कि कई बार भूमि के सौदेबाजी में भुगतान फंस जाता है। ऐसे में समय मिलने पर विक्रेता आपत्ति लगा देते थे। नई प्रक्रिया में मौका नहीं मिलेगा। यदि किसी ने भरोसे में लेकर धोखाधड़ी कर दी तो भूमि हाथ से निकल जाएगी। इससे विक्रेता को परेशान होना पड़ेगा। नाम सहित अन्य किसी तरह की गड़बड़ी होने पर सुधार कराने का मौका नहीं मिल पाएगा।

फर्जी बैनामा-खतौनी बनेंगे मुसीबत
अधिवक्ता कीर्तिनिधि पांडेय ने कहा कि इसमें फर्जी बैनामा होने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ेगी। खतौनी जारी होने के बाद इसमें लोग वाद दाखिल करेंगे। उसका फैसला होने पर लंबा समय लग जाएगा। इससे दिक्कत आने आशंका है। यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू होने बाद ही कुछ चीजें स्पष्ट हो सकेंगी।

रियल टाइम खतौनी से होगी आसानी
सदर तहसीलदार विकास सिंह ने कहा कि अभी खतौनी 13 कालम की है। रियल टाइम खतौनी 19 कालम की होगी। इसमें आधार नंबर/ पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, जाति, गाटा का यूनिक कोड, हर खातेदार का अंश इत्यादि का जिक्र होगा। हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी खतौनी को समझने में सुविधा होगी।

 
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