सदर तहसील परिसर में खतौनी लेने के लिए लगी लोगों की लाइन
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तहसील के अधिकारियों का कहना है कि रियल टाइम खतौनी के लिए नए सिरे से नक्शा तैयार होगा। इसमें भूमि के हर टुकड़े की जानकारी दर्ज होगी। खतौनी, खेत के गाटा संख्या के आधार पर तैयार होगी। इसमें भूमि की प्रकृति अथवा अंश का जिक्र किया जाएगा। भूमि के संबंध में सीलिंग, संक्रमणीय, असंक्रमणीय, पट्टेदार, नवीन परती, आबादी, रास्ता अथवा चकरोड की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
खातेदार का अंश स्पष्ट होने से अलग से हिस्सा प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भूमि के साथ पुश्तैनी मकान और अन्य अचल संपत्तियों का ब्यौरा होगा। इसमें हर गाटा का एक यूनिक कोड होगा। राजस्व न्यायालयों में चल रहे भूमि के विवादों की जानकारी मिल सकेगी। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने, लोन के दस्तावेज तैयार कराने में सुविधा होगी। रियल टाइम खतौनी में भूमि मालिक की जाति के कोड का उल्लेख होगा। अलग से जाति प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी।
डीएम, एसडीएम के आदेश पर होगा सुधार
रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की लिपिकीय त्रुटि को ठीक कराने के लिए डीएम अथवा एसडीएम के आदेश की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए क्रेता को आवेदन करना होगा। संबंधित अधिकारी इसका परीक्षण करके आदेश जारी करेंगे। इसके बाद ही संशोधन हो सकेगा। खतौनी में अक्सर नाम, पति का नाम, पिता का नाम, गाटा संख्या सहित अन्य गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी दशा में लंबी प्रक्रिया होगी। वहीं फर्जी बैनामा कराए जाने पर खतौनी निरस्त कराने के लिए पहले की तरह मुकदमा करना पड़ेगा। इसमें काफी वक्त गुजर जाएगा।
प्रथम उप निबंधक धीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि रियल टाइम खतौनी में जमीन खरीदते ही लोग मालिक बन जाएंगे। किसी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जमीन खरीदने के पहले उसका मुआयना जरूर करा लें। अच्छे अधिवक्ताओं से राय लें। बिचौलियों पर किसी तरह का भरोसा न करें। दस्तावेज लिखे जाने के दौरान भी उसकी पूरी जानकारी लें।
गड़बड़ी हुई तो सुधार नहीं होगा
अधिवक्ता जयराम वर्मा ने कहा कि रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसमें संशोधन नहीं हो सकेगा। इससे पूरक बैनामा कराने का समय नहीं मिलेगा। मसलन, किसी बैनामे के दौरान गाटा नंबर या चौहद्दी इत्यादि में गड़बड़ी हो जाती है तो पूरक बैनामा कराकर उसे सुधार लिया जाता है।
बंटवारा न होने पर दिक्कतें
अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कहा कि यदि किसी भूमि का बंटवारा नहीं हुआ है। उसका रकबा टूटा नहीं है। तो उसकी चौहद्दी तय करने में कठिनाई होगी। यदि सहखातेदार ने कोई आपत्ति करते हुए वाद दाखिल कर दिया तो इसमें स्थगन आदेश जारी हो सकता है। इससे पीड़ितों को कचहरी का चक्कर लगाने ही पड़ेंगे।
अधिवक्ता संजय चौरसिया ने कहा कि कई बार भूमि के सौदेबाजी में भुगतान फंस जाता है। ऐसे में समय मिलने पर विक्रेता आपत्ति लगा देते थे। नई प्रक्रिया में मौका नहीं मिलेगा। यदि किसी ने भरोसे में लेकर धोखाधड़ी कर दी तो भूमि हाथ से निकल जाएगी। इससे विक्रेता को परेशान होना पड़ेगा। नाम सहित अन्य किसी तरह की गड़बड़ी होने पर सुधार कराने का मौका नहीं मिल पाएगा।
फर्जी बैनामा-खतौनी बनेंगे मुसीबत
अधिवक्ता कीर्तिनिधि पांडेय ने कहा कि इसमें फर्जी बैनामा होने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ेगी। खतौनी जारी होने के बाद इसमें लोग वाद दाखिल करेंगे। उसका फैसला होने पर लंबा समय लग जाएगा। इससे दिक्कत आने आशंका है। यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू होने बाद ही कुछ चीजें स्पष्ट हो सकेंगी।
रियल टाइम खतौनी से होगी आसानी
सदर तहसीलदार विकास सिंह ने कहा कि अभी खतौनी 13 कालम की है। रियल टाइम खतौनी 19 कालम की होगी। इसमें आधार नंबर/ पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, जाति, गाटा का यूनिक कोड, हर खातेदार का अंश इत्यादि का जिक्र होगा। हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी खतौनी को समझने में सुविधा होगी।