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खेल दिवस विशेष: 116 साल पहले गोरखपुर में ऐसे शुरू हुआ था हॉकी का सफर, इन खिलाड़ियों ने किया नाम रोशन

Sat, 29 Aug 2020 03:36 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी दिवाकर। - फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर में हॉकी का इतिहास 116 साल पुराना है। जिले में हॉकी की शुरुआत 1906 में इंग्लिश जिमखाना की स्थापना के साथ हुई। 1906 में वीएन डब्ल्यू रेलवे जिसे आज पूर्वोत्तर रेलवे के नाम से जाना जाता है, इसके अंग्रेज खिलाड़ियों ने जिमखाना की स्थापना की।

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उनकी देखरेख में गोरखा रेजीमेंट तथा सिविल पुलिस के खिलाड़ी विंध्यवासिनी पार्क के मैदान में सप्ताह में दो-तीन दिन हॉकी का अभ्यास करते थे। पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी और राष्ट्रीय अंपायर मोहम्मद शहाबुद्दीन सिद्दीकी के अनुसार वर्ष -1907 में बर्टन और आएल विलिस के प्रयास से जुबिली हाईस्कूल, सेंट एंड्रयूज स्कूल, गवर्नमेंट टेक्निकल स्कूल, गोरखपुर हाईस्कूल अब (एमजी कॉलेज) में हॉकी खेली जाने लगी।

1914 में शिक्षण संस्थाओं में इस खेल के प्रचार एवं प्रसार के लिए सेंट एंड्रयूज कॉलेज के प्रो. एनएन मंडल की अध्यक्षता में हॉकी संघ की स्थापना हुई। जिसमें जुबिली कॉलेज के गेम्स अधीक्षक एपी मुखर्जी और सेंट एंड्रयूज कॉलेज आरबी रोवेथन की निगरानी में शिक्षण संस्थाओं के लिए पीस कप हॉकी टूर्नामेंट शुरू किया गया।

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देश का नाम रोशन कर रहे हैं गोरखपुर के खिलाड़ी।

1916 में काजी मोहम्मद उस्मान के कुशल निर्देशन में जार्ज इस्लामिया हाईस्कूल (अब मियां साहब इस्लामियां इंटर कॉलेज) में हॉकी की शुरुआत हुई। वर्ष 1945 को गोरखपुर हॉकी का स्वर्णिम इतिहास कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इस वर्ष अब्दुल मुईद, शांता राम और इस्लामियां इंटर कॉलेज के गेम अधीक्षक काजी उस्मान के प्रयास से राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप आयोजित हुई। उसमें कई राज्यों सहित रेलवे और सेना की हॉकी टीम ने हिस्सा लिया।

1950 के बाद गोरखपुर के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम में जगह बनानी शुरू कर दी। अनवार अहमद को देश का बेहतरीन राइट इन माना जाता था। 1960-70 के दशक में इस्लामिया कॉलेज के नसीरूल्लाह खां, अवध नरेश और यूसुफ खान ने धूम मचाई तो सैयद मोहम्मद अली टोकियो ओलंपिक के लिए चुने गए। टीम ने गोल्ड मेडल जीता तो गोरखपुर का नाम रोशन हुआ।

1966 में एनएन गौड़, आरबी सिंह, एम. हक के नाम छाए रहे। 1970-80 के दशक में महिला खिलाड़ी प्रेममाया, रंजना श्रीवास्तव, पुष्पा श्रीवास्तव ने धूम मचाई। तीनों ही भारतीय टीमों के साथ विदेशी दौरे पर गईं। प्रेम माया को 1986 में अर्जुन अवार्ड मिला। 1980-90 के दशक में जिल्लुर्रहमान, मोहम्मद आरिफ, सनवर अली, इम्तियाज अहमद, प्रदीप शर्मा, शम्सुज्जोहा ने भारतीय टीम के साथ कई देशों का दौरा और अपनी प्रतिभा से शहर का नाम रोशन किया। इनके अलावा प्रीति दुबे और दिवाकर राम भी हॉकी में गोरखपुर का नाम रोशन कर रहे हैं।
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