सेंट एंड्रयूज कॉलेज हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील राय ने बताया कि हिंदी ऐसी भाषा है जिसमें हम जो लिखते हैं वही बोलते हैं। अंग्रेजी में ऐसा नहीं है। अंग्रेजी में कई अक्षर खामोश होते हैं। वहीं, हिंदी संवेदनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। मेरी रुचि हिंदी में बचपन से थी। हिंदी से स्नातक, परास्नातक और शोध किया। अब हिंदी विषय का शिक्षक हूं। मुझे इस भाषा पर गर्व है। हिंदी में रोजगार के बहुत सारे अवसर हैं। जितने भी विज्ञापन हैं वे सब हिंदी में हैं, क्योंकि यह भाषा आकर्षित करती है।
डीवीएनपीजी कॉलेज हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विभा सिंह ने बताया कि हिंदी से वास्तविकता का भाव प्रकट होता है। हिंदी के जरिए आंतरिक अनुभूति सामने आती है। जब स्नातक में विषय चुनना हुआ तो मैंने पहला विषय हिंदी ही चुना। हिंदी में ही शोध किया और अब शिक्षक भी बन गई। हिंदी में भी भविष्य है, इसमें रोजगार की संभावनाएं ज्यादा हैं। लेकिन हिंदी को बेहतर तरीके से समझना होगा। जहां तक नई पीढ़ी का सवाल है तो हम सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों को हिंदी के प्रति प्रेरित करें।