राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर के पहलवानों ने कुश्ती में अपना लोहा मनवाया है। वे करीब 50 वर्षों से बाबा गोरखनाथ की माटी की खुशबू बिखेर रहे हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए यहां खेलो इंडिया का एक सेंटर स्थापित होगा, जिससे पहलवानों की मंजिल अब और आसान हो जाएगी।
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवानों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक की उम्मीदों को बरकरार रखा है। रवि दहिया ने 57 किलोभार वर्ग के फाइनल में प्रवेश करने तो दीपक पुनिया के लिए ब्रांज मेडल के लिए क्वालिफाई करने से देश को ओलंपिक में कुश्ती से पदक की उम्मीदें बढ़ गई है। बजरंग और विनेश ने भी सभी मैच में दमखम दिखाया है।
बाबा गोरक्षनाथ की धरती ने भी देश को एक से बढ़कर एक धुरंधर पहलवान दिए हैं, जो 1970 से ही गोरखपुर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। वर्तमान में भी ये सिलसिला जारी है। हाल ही में एक जिला एक खेल के तहत गोरखपुर से कुश्ती को शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत यहां खेलो इंडिया का सेंटर खोला जाएगा। यहां के पहलवानों को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
कुश्ती के लिए गोरखपुर के स्पोर्ट्स कॉलेज, रीजनल स्टेडियम और रेलवे स्टेडियम में मैट की सुविधा उपलब्ध है। स्पोर्ट्स कॉलेज में 85, रीजनल स्टेडियम में 20 और रेलवे स्टेडियम में 20 कुश्ती के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। शहरी क्षेत्र में कृष्णानगर व्यायामशाला और ग्रामीण क्षेत्र में चतुर बंदुआरी गांव में मैट है। इसके अलावा शहर के सबसे पुराने अखाड़े पक्कीबाग, शिवाजी व्यायामशाला, खजनी, ककराखोर, डेरवां समेत ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 से अधिक जगहों पर मिट्टी के अखाड़े हैं, जिनमें हजारों बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं।