चुनाव जीतने के बाद आशा देवी ने यह कहा था कि वह गरीब और समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों के साथ है। उन्होंने वादा किया कि वह रिक्शे से ही आया जाया करेंगी। इसके लिए उन्हें एक अलग तरीके का रिक्शा बनवाया था। शपथ ग्रहण के बाद वह जब रिक्शा से नगर निगम पहुंची तो हर किसी कि निगाह उन पर टिक गई। लाल बत्ती लगा रिक्शा शहर के सड़कों पर जब दौड़ने लगा तो लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया।
चुनाव प्रचार में आई थीं शबनम मौसी
आशा देवी के चुनाव की भूमिका एक चिकित्सक और एक मीडिया से जुड़े व्यक्ति की भले ही रही हो। उनके प्रचार की कमान उस समय मध्य प्रदेश की विधायक किन्नर शबनम मौसी ने संभाली थी। चुनाव प्रचार के दौरान कई दिनों तक शहर में डेरा डाली शबनम मौसी ने कई सभाओं को संबोधित कर जनता को आशा देवी के पक्ष में करने का काम किया था।
स्थानीय किन्नरों ने भी संभाला था मोर्चा
आशा देवी के नामांकन से लेकर मतदान तक यहां के किन्नरों ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी। किन्नरों का समूह उस दौरान यह नारा लगा रहा था ‘नेताओं ने क्या दिया, भाई भतीजा वाद दिया’ उस दौरान काफी चर्चित रहा। नेताओं की प्रति लोगों का गुस्सा उस समय फूट रहा था। उसी का परिणाम था कि आशा देवी मेयर चुन ली गई। 2013 में आशा देवी का आकस्मिक निधन हो गया था।