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Gorakhpur News: नेपाल से लाकर खपाया जा रहा तस्करी का कॉस्मेटिक सामान, ऐसे कमा रहे हैं लाभ

Wed, 29 Nov 2023 03:19 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

एक ही कंपनी भारत और नेपाल दोनों जगहों के लिए उत्पाद तैयार करती है। कई भारतीय कंपनियों की फैक्ट्री नेपाल में चलती हैं। वहां पर उसका रेट अलग होता है। लेकिन, वहां के तय भाव से यहां एमआरपी पर उसी सामान की खरीद की जाती।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नेपाल से कॉस्मेटिक सामान की तस्करी जिले में हो रही है। वहां के बाजार से सस्ते दरों पर मिलने वाले कॉस्मेटिक के सामान को बिना लिखा-पढ़ी के चोरी से यहां के बाजार में खपाया जा रहा है। रेट के बीच तय फायदे का लाभ तस्करों से लेकर दुकानदार तक उठा रहे हैं।

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शहर के कई बाजारों में शैंपू, टूथ पेस्ट, क्रीम, साबुन, लिपिस्टिक सहित अन्य कॉस्मेटिक्स के सामान को खपाया जाता है। छोटी-छोटी दुकानों में लाखों रुपये के सामान का स्टॉक रखकर दुकानदार आराम से ग्राहकों से मनमाने दाम कर बिक्री करते हैं। लेकिन, जीएसटी विभाग या मोबाइल सेक्टर की टीम इससे बेफिक्र है।

उधर डुप्लीकेट सामान भी बाजार में खपाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी के सूत्र ने बताया कि नेपाल में मिलने वाले कॉस्मेटिक के ज्यादातर सामान बेहद सस्ते होते हैं। नेपाली रुपये के हिसाब से माल खरीदकर तस्कर उसे गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जगहों पर पहुंचा देते हैं।
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बड़े बाजारों में ब्रांडेड कंपनियों के स्टॉकिस्ट इन सामान को रखते हैं। थोक ग्राहकों को स्टॉकिस्ट माल थमा देते हैं। फुटकर मार्केट में यही सामान ग्राहकों तक पहुंच जाता है। बताया गया कि नेपाल और भारत में एक ही प्रोडक्ट के रेट में 20 से 22 रुपये का अंतर होता है। ग्राहक कोई सामान लेते समय एमआरपी देखकर पेमेंट कर देते हैं। जबकि, कंपनी के नाम से लिखा प्रोडक्ट डुप्लीकेट होता है।

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पहचान नहीं होने से खपाने में होती है आसानी
एक ही कंपनी भारत और नेपाल दोनों जगहों के लिए उत्पाद तैयार करती है। कई भारतीय कंपनियों की फैक्ट्री नेपाल में चलती हैं। वहां पर उसका रेट अलग होता है। लेकिन, वहां के तय भाव से यहां एमआरपी पर उसी सामान की खरीद की जाती। ऐसे में पहचान होने में मुश्किल होने के साथ अधिक रुपये भी मिल जाते। नेपाल से लाए ये सामान घंटाघर, शाहमारूफ, साहबगंज, पांडेयहाता सहित कई जगहों पर बिकते हैं।

इन सामान की तस्करी ज्यादा
नेल पेंट, लिपिस्टिक, क्रीम, लेडीज अंडरगारमेंट्स, लाइट्स, हैंडवाच, खिलौने, इलेक्ट्रानिक खिलौने, डियो और परफ्यूम सहित अन्य सामान।

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जीएसटी अगर दिखाती सख्ती तो कसता नकेल
वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत ही ये सामान और इनके स्टॉकिस्ट व थोक व्यापारी आते हैं। जीएसटी के मोबाइल सेक्टर की जिम्मेदारी होती है कि ट्रांसपोर्ट होने वाले सामान की जांच करें और उन्हें नियमानुसार क्रय- विक्रय नहीं करने पर जुर्माना लगाएं। लेकिन टीम की सुस्ती और निष्क्रियता का असर है कि ये व्यापारी काली कमाई भी करते हैं और लोगों को असली के चक्कर में नकली माल भी पकड़ा देते।

ग्रेड वन एडिश्नल कमिश्नर विमल कुमार राय ने कहा कि गोपनीय तरीके से इन व्यापारियों पर भी निगरानी की जाएगी। कुछ बिंदुओं पर अपनी टीम को सलाह दी जाएगी। व्यापारियों को नियमानुसार जीएसटी में जमा करनी चाहिए। चोरी करने पर पकड़े जाने पर अतिरिक्त जुर्माना भी भरना होता है।

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जीएसटी अगर दिखाती सख्ती तो कसता नकेल
वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत ही ये सामान और इनके स्टॉकिस्ट व थोक व्यापारी आते हैं। जीएसटी के मोबाइल सेक्टर की जिम्मेदारी होती है कि ट्रांसपोर्ट होने वाले सामान की जांच करें और उन्हें नियमानुसार क्रय- विक्रय नहीं करने पर जुर्माना लगाएं। लेकिन टीम की सुस्ती और निष्क्रियता का असर है कि ये व्यापारी काली कमाई भी करते हैं और लोगों को असली के चक्कर में नकली माल भी पकड़ा देते।

ग्रेड वन एडिश्नल कमिश्नर विमल कुमार राय ने कहा कि गोपनीय तरीके से इन व्यापारियों पर भी निगरानी की जाएगी। कुछ बिंदुओं पर अपनी टीम को सलाह दी जाएगी। व्यापारियों को नियमानुसार जीएसटी में जमा करनी चाहिए। चोरी करने पर पकड़े जाने पर अतिरिक्त जुर्माना भी भरना होता है।

 
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