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गोरखपुर: मनीष हत्याकांड में छठवां आरोपी गिरफ्तार, एक लाख का इनामी था दरोगा विजय यादव

Sat, 16 Oct 2021 05:12 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर में हुए मनीष गुप्ता हत्याकांड में रामगढ़ताल थाने में तैनात इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा राहुल दुबे, मुख्य आरक्षी कमलेश यादव, आरक्षी प्रशांत कुमार और दरोगा विजय यादव को आरोपी बनाया गया है।
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आरोपी दरोगा विजय यादव - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत मामले में छठवें हत्यारोपी निलंबित दरोगा विजय यादव को शनिवार को कैंट पुलिस ने रेल म्युजियम के पास से गिरफ्तार कर लिया। वह कोर्ट में सरेंडर करने के लिए आया था, इसी बीच मुखबिर की सूचना पर कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की टीम ने आरोपी को पकड़ लिया। जौनपुर निवासी विजय पर भी एक लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने आरोपी को एसआईटी को सुपुर्द कर दिया है। रामगढ़ताल थाने में एसआईटी आरोपी दरोगा से पूछताछ कर रही है।

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जानकारी के मुताबिक, मनीष की मौत मामले में पुलिस ने छह हत्यारोपी पुलिस वालों की तलाश में थी। जौनपुर जिले के बख्शा थानाक्षेत्र स्थित चितौड़ी गांव का रहने वाला दरोगा विजय यादव फरार चल रहा था। उसे पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच, रामगढ़ताल पुलिस के साथ ही एसआईटी कानपुर की टीम गाजीपुर, जौनपुर लखनऊ के साथ ही दोस्तों और रिश्तेदारों के घर के छापेमारी कर रही थी। लेकिन विजय यादव पकड़ से दूर था।




शनिवार की दोपहर विजय सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करने के फिराक में गोरखपुर पहुंचा था। सूचना पर पहुंचे कैंट थाना प्रभारी सुधीर सिंह ने घेराबंदी कर दबोच लिया। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि फरार चल रहे दारोगा विजय यादव को कैंट पुलिस ने पकड़कर एसआइटी को सुपुर्द कर दिया है। कोर्ट में सरेंडर करने के इरादे से वह गोरखपुर आया था। मनीष गुप्ता हत्याकांड में रामगढ़ताल थाने में तैनात इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा राहुल दुबे, मुख्य आरक्षी कमलेश यादव, आरक्षी प्रशांत कुमार और दरोगा विजय यादव को आरोपी बनाया गया है।

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ये है पूरा मामला...

कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया।

आरोप है कि पुलिस वालों ने उनकी पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस की ओर से नशे में गिरने से मौत बताया था मगर बाद में हत्या का केस दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, तब जाकर परिवार के लोग शव लेकर कानपुर रवाना हुए थे।
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