बिजनौर के चांदपुर में मिले तेंदुए के शावकों, सिंबा और सिंबी को मंगलवार को चिड़ियाघर लाया गया। चार दिन पहले चांदपुर के जंगल में मां ने दोनों शावकों को छोड़ दिया था। स्थानीय वन प्रभाग के अधिकारियों ने तीन दिन तक जंगल में ही मां के आने का इंतजार किया।
डीएफओ बिजनौर ने उनका नाम सिंबा और सिंबी रख दिया। मादा तेंदुआ के नहीं आने पर दोनों शावकों को शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणि उद्यान भेजने का फैसला किया। चिड़ियाघर लाकर उन्हें पशु अस्पताल में रखा गया है।
दरअसल, तीन दिन पहले चांदपुर रेंज में लोधीपुर के जंगल में तेंदुए के तीन शावक मिले। ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित रखते हुए इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग को दे दी। वन अधिकारियों ने शावकों को ऐसी जगह रखा था कि जहां मादा तेंदुआ आकर उन्हें अपने साथ लेते जाती। उसी रात मादा तेंदुआ अपने साथ एक शावक को लेकर चली गई, जबकि दो शावकों को वहीं छोड़ दिया।
दोनों शावकों को वहां देख वन विभाग ने अपनी निगरानी में दो दिन और जंगल में उन्हें रखा। लेकिन, इस दौरान भी मादा तेंदुआ नहीं आई। बिजनौर के डीएफओ अनिल पटेल ने दोनों का नाम सिंबा और सिंबी रख दिया। वन विभाग की टीम ने गोरखपुर चिड़ियाघर से संपर्क किया। इसके बाद मंगलवार को दोनों शावकों को चिड़ियाघर लाया गया।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों शावकों को मंगलवार की सुबह बिजनौर की स्थानीय वन प्रभाग की टीम साथ लेकर आई है। दोनों को फिलहाल पशु अस्पताल में रखा गया है।