गोरखपुर जिले की सियासत में करीब दो दशक तक महिलाएं छाई रहीं। 1980 और 90 के दशक में महिलाओं ने यहां सक्रिय भूमिका निभाई। मुंडेरा बाजार विधानसभा सीट से (अब चौरीचौरा) में शारदा देवी पांच बार विधायक चुनी गईं तो कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से गौरी देवी तीन बार सदन में पहुंचने में कामयाब हुईं। इसी दौर में सहजनवां और मानीराम (अब कैंपियरगंज) विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत कर आधी आबादी ने अपनी ताकत का अहसास कराया था।
सदन में महिलाओं की भागीदारी के लिहाज से मुंडेरा बाजार विधानसभा सबसे ज्यादा चर्चित रही। पांच बार चुनाव जीतकर शारदा देवी ने अपनी जमीनी पकड़ से सभी का ध्यान आकर्षित किया था। शारदा देवी एक किसान परिवार से थीं, लेकिन क्षेत्र में उनकी पहचान संघर्ष करने वाली महिला की थी। कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र (अब गोरखपुर ग्रामीण) से गौरी देवी ने भी अपने पति रवींद्र सिंह की विरासत को संभाला था। वह तीन बार निर्वाचित हुईं।
इसी तरह 1980 में सहजनवां से किशोरी शुक्ला, कांग्रेस से चुनाव जीत कर सदन में पहुंचीं। इसी विधानसभा क्षेत्र से कद्दावर नेता शारदा प्रसाद रावत की विरासत को उनकी पत्नी प्रभा रावत ने संभाला था। वे,1993 में सपा से विधायक चुनी गईं। 1996 के चुनाव में मानीराम विधानसभा क्षेत्र से सुभावती पासवान भी विधायक चुनी गईं।
दो चुनाव बाद संगीता यादव जीतीं
2002 के चुनाव के बाद सदन में जिले से महिलाओं की भागीदारी अचानक समाप्त हो गई। दो चुनावों में एक भी महिला प्रत्याशी जीतने में कामयाब नहीं हुई। वर्ष 2017 में चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के बैनर तले संगीता यादव निर्वाचित होकर सदन में पहुंचीं। हालांकि, इसी बीच 2012 में सपा के टिकट पर शारदा देवी बांसगांव से तथा 2017 में सपा-कांग्र्रेस गठबंधन से चिंता यादव, कैंपियरगंज से चुनाव लड़ी। दोनों ही चुनाव में इन प्रत्याशियों को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण है। लेकिन, विधानसभा और लोकसभा में ऐसा नहीं। राजनीति में महिलाओं की कम भागीदारी की यह एक बड़ी वजह है। आरक्षण की लगातार मांग उठती रही है। संसद में यूपीए की सरकार में एक बार महिला आरक्षण का बिल भी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन क्षेत्रीय दलों ने विरोध किया। जनसंख्या के आधार पर आधी आबादी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी। - डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, सहायक आचार्य गोविवि, राजनीतिक विश्लेषक
कब, कौन जीता
चौरीचौरा (पहले मुंडेरा बाजार)
शारदा देवी : जेएनपी से (1977), एलकेडी से (1985), जनता दल से (1989 व 1991), सपा से (2002)
संगीता यादव (2017)
सहजनवां
किशोरी शुक्ला कांग्रेस से (1980), सपा से प्रभा रावत (1993)
मानीराम (अब कैंपियरगंज)
सपा से सुभावती देवी (1996)
कौड़ीराम (अब गोरखपुर ग्रामीण)
गौरीदेवी : जेएनपी से (1980), जनता दल से (1989), सपा से (1996)