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खजनी तहसील में तोड़ा था दम: साधु शरण की मौत के जिम्मेदार अब भी आजाद, सात माह गुजरे नहीं मिला इंसाफ

Sat, 05 Mar 2022 10:48 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

खजनी तहसील में फरियाद लेकर पहुंचे साधु शरण ने दम तोड़ा था। दर्ज केस की विवेचना अब भी जारी पर चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी थी।
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साधु शरण। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अपनी जमीन की खतौनी ठीक कराने और कब्जा पाने के लिए कई साल से दौड़भाग करने वाले खजनी खुटभार के साधु शरण विश्वकर्मा (65) को मौत के सात महीने बाद भी न्याय नहीं मिला। उनकी मौत के बाद एक बारगी पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने तेजी दिखाई थी, लेकिन सारी कवायद दिखावा साबित हुई। दर्ज केस में पुलिस तफ्तीश जारी होने की दलील देती है। दूसरी ओर आरोपी बेरोकटोक घूम रहे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, दबाव में पुलिस ने एक आरोपित पर केस दर्ज कर लिया था, लेकिन समय के साथ उसे भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर पुलिस की फाइल खुली है, लेकिन आज तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। गांव में जाकर दावे करने वाले अफसर भी खामोश बैठ गए हैं। लेखपाल एक दिन के बाद दोबारा नहीं गए।

पीड़ित परिवार खुद की बदनसीबी को ही अपनी नियति मानकर सिस्टम के सामने घुटने टेक चुका है। विवेचक अरविंद राय ने बताया कि पत्रावलियों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस जांच का अंत कब होगा, इसका उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका।
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210 दिन से जांच, नतीजा कुछ भी नहीं

न्याय की आस में परिवार को इंतजार करते 210 दिन गुजर चुके हैं। जब मौत हुई तो अफसर इस कदर दौड़े, लगा कि शायद साधु शरण को मौत के बाद ही सही, न्याय तो मिल ही जाएगा। हकीकत इसके उलट है। पिछले 210 दिन में पुलिस सिर्फ पत्रावली ही एकत्र कर पाई है और जांच जारी होने का हवाला दिया जाता है।

साधु शरण को कब मिलेगा न्याय?

आरोपी पकड़े जाएंगे या जांच में खेल हो गया है, इसकी जानकारी तो तब ही हो पाएगी जब अंतिम नतीजा सामने आएगा। मगर इतना साफ है कि न्याय देने की जिस ढीली प्रक्रिया ने साधु शरण की जान ली, उससे ही अब परिवारीजन जूझ रहे हैं। उन्हें न्याय कब मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।

दो विवेचक बदले पर तफ्तीश पूरी नहीं

मामले की तफ्तीश कर रहे विवेचक संजय सिंह चार्जशीट लगाने का दावा करते-करते स्थानांतरित हो गए। अब एसआई अरविंद राय को विवेचना सौंपी गई है। करीब छह महीने से उनको जांच मिली है, लेकिन न तो गिरफ्तारी हुई और न ही चार्जशीट दाखिल हुई।


 
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यह हुआ था

17 जुलाई 2021 को संपूर्ण समाधान दिवस के दिन अपनी फरियाद लेकर साधु शरण खजनी तहसील गए थे। यहां पर इंसाफ पाने की चाह में लाइन में लगे साधु शरण की मौत हो गई थी। पहले तो प्रशासनिक अफसरों ने मौत पर ही पर्दा डालने की कोशिश की, लेकिन अमर उजाला के प्रमुखता से मामला उठाने पर मामले ने तूल पकड़ लिया। तत्कालीन एसडीएम खजनी पवन कुमार, सीओ खजनी (वर्तमान में एसपी क्राइम) इंदु प्रभा सिंह भी साधु शरण के घर पहुंच गईं।

अफसरों ने इंसाफ दिलाने के इतने बड़े-बड़े वादे किए कि परिवार को लगा कि शायद उनकी मौत के बाद ही सही, इंसाफ तो मिल ही जाएगा। पुलिस ने इस मामले में जिनका नाम सामने आया था उसके खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने, धमकी देने की धारा के तहत केस दर्ज करने की औपचारिकता भी पूरी कर ली, पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।

एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि मामले की जानकारी कर कार्रवाई कराई जाएगी। पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।
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