Gorakhpur news
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गोरखपुर से होकर बहने वाली राप्ती नदी को गंगा की सहायक नदी माना जाता है, लेकिन नदी में गंदे नालों को गिरने से रोकने के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद भी शहर के 21 बड़े व 18 छोटे नालों का गंदा पानी राप्ती नदी के साथ रोहिन नदी और रामगढ़ताल में गिर रहा है।
रोज प्रदूषित हो रहीं नदियां
शहर में नालों की लंबाई करीब 61 किलोमीटर है। राप्ती नदी में प्रतिदिन करीब 55 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी गिरता है। सबसे अधिक गंदगी सिविल लाइंस, कार्मल स्कूल, पुलिस लाइंस, धर्मशाला बाजार, जाफरा बाजार से इलाहीबाग तक जाने वाले नाले से होती है। इस नाले से 25 हजार से अधिक घरों का पानी राप्ती नदी में पहुंचता है। यही हाल रोहिन नदी का भी है। रोहिन नदी राप्ती मिलती है और राप्ती नदी सरयू में जाकर विलीन होती है। सरयू आगे जाकर गंगा नदी में मिलती है। इस तरह रोहिन और राप्ती की गंदगी गंगा तक पहुंच रही है।