सीता देवी का कहना है कि उनका बेटा किशन मझवार, हरबंश गली स्थित एक दुकान पर काम करता है। जिस फर्म के नाम से दुकान है, उसके मालिक सोने के होलसेल का कारोबार करते हैं। बेटा किशन पिछले तीन वर्ष से उनके यहां काम कर रहा है। वे अपने दुकान का सोना प्रतिदिन अपनी दुकान से निकाल कर बाहर किसी के यहां रखते हैं।
26 जून को भी उन्होंने दुकान से एक झोला बेटे के हाथ से अपने एक रिश्तेदार के लड़के जीतेंद्र वर्मा को देने को कहा। बेटा उन्हें जेवर देते आया। मंगलवार को बाजार बंद रहता है, इसलिए बुधवार को वह झोला वापस मंगवाया गया, लेकिन उस झोले में एक डिब्बा खाली था। जबकि झोले में डिब्बा है या नहीं, इसकी जानकारी बेटे को नहीं थी।
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आरोप है कि डिब्बा खाली देखकर सराफा कारोबारी के बेटे उनके लड़के को उठाकर अपने घर लेकर चले गए। घर पर सोने के कारोबारी, उनके बेटों ने दोपहर 2 बजे से शाम 10 बजे तक कमरे में बंद कर पिटाई की। पीटने के बाद बेटे को राजघाट थाने लेकर चले गए। किशन के मामा ने बताया कि दो और लड़कों को राजघाट थाने में रखा गया है। पिटाई सिर्फ किशन की ही गई।
मुख्यमंत्री से शिकायत में सीता देवी ने आरोप लगाया कि बेटे से पूछताछ करने पर उन्होंने व बेटों ने जाति सूचक शब्दों के साथ बेइज्जत किया। धमकी देते हए कहा कि अगर हमारा सोना नहीं मिला तो परिवार को जान से मार देंगे। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने के साथ दोषियों पर गंभीर कार्रवाई की जाए।
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सराफा बाजार में माफिया से संपर्क रखने वाली तिकड़ी ने मामले को दबाने की पूरी कोशिश की। लेकिन, बाजार के कुछ कारीगरों के समझाने के बाद पीड़ित महिला ने मामले के मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया।
भाजपा नेता और सराफा व्यापारी पुत्र का विवाद भी सीसीटीवी कैमरे में कैद
हिंदी बाजार में मामला चर्चा में आने के बाद भाजपा के एक नेता भी बाजार पहुंच गए। एक दुकान पर पीड़ित महिला के परिजन बैठे थे, इसी बीच दुकान के बाहर सराफा व्यापारी का बेटा भी आ गया। परिजनों ने बताया कि इसी ने बेटे की पिटाई की।
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भाजपा नेता ने बेटे से पूछा कि अगर लड़के ने गलती की थी तो इसकी शिकायत थाने में करते, केस दर्ज करवाते। लेकिन, खुद पीटने की क्या जरूरत थी। ये सारी बातें एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। भाजपा नेता ने बताया कि पूरे मामले को लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी बात की है।