ज्यादा साफ मतलब मिलावट अधिक
खोवा का कारोबार करने वाले विजय कुमार बताते हैं कि बाजार में चार रेट के खोवा मौजूद हैं। सबसे अच्छी क्वालिटी का खोवा जिसे देसी कहा जाता है, उसकी कीमत 550 रुपये प्रति किलो है। इसमें मिलावट की गुंजाइश नहीं होती। गेहूं के रंग जैसा दिखने वाला खोवा स्वाद और सुंगध में भी औरों से अलग होता है।
इसके बाद 450 रुपये, 300 रुपये और 220 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव का भी खोवा उपलब्ध है, लेकिन इनमें पाउडर और रिफांइड ऑयल की मिलावट है। पाउडर को रिफाइंड में गूंथकर यह खोवा तैयार होता है। इसी प्रकार सागर पाउडर से बने दूध और सोयाबीन को पीसकर पनीर बनाया जाता है।
ऐसे करें पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी बताते हैं कि खोवा में आलू, आटा, शकरकंदी समेत कई वस्तुएं मिलाई जा रही हैं। अभी तक साढ़े चार क्विंटल मिलावटी खोवा जब्त किया जा चुका है। अन्य जगहों से लिए गए नमूनों की जांच भी की जा रही है। लोग थोड़ी सी सावधानी से इसे पहचान सकते हैं।
अगर खोवा से दुर्गंध आ रही है, तो वह खराब है। इसे कत्तई न खरीदें।
खोवा को हथेली पर रखकर गोली बनाएं। अगर गोली एकदम चिकनी है तो खोवा ठीक होगा।
खोवा को हथेली पर रखकर कुछ देर तक मसलें। इससे शुद्ध देसी घी की सुगंध आएगी।
खोवा को गर्म करें और उस पर एक बूंद आयोडीन टिंचर डालें। अगर खोवा का रंग नीला हो जाए तो समझ लें कि उसमें मिलावट है।