गोरखपुर में अपनी जमीन की खतौनी ठीक कराने और कब्जा पाने के लिए कई साल से दौड़भाग करने वाले खजनी खुटभार के साधुशरण विश्वकर्मा (65) के मौत मामले में पुलिस एक बार फिर सुस्त पड़ गई। एसएसपी के आदेश के बाद सक्रिय हुई खजनी पुलिस शनिवार को हरकत में आई थी, लेकिन वीआईपी ड्यूटी का हवाला देकर सुस्त हो गई। पुलिस के बुलाने पर भी आरोपी थाने नहीं आया।
जानकारी के मुताबिक, दबाव में पुलिस ने एक आरोपित पर केस दर्ज कर लिया था, लेकिन समय के साथ उसे भी दबा दिया गया। जांच के नाम पर पुलिस की फाइल खुली है, लेकिन आज तक गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी। गांव में जाकर दावे करने वाले अफसर भी खामोश बैठ गए हैं।
लेखपाल एक दिन के बाद दोबारा नहीं गए और पीड़ित परिवार खुद की बदनसीबी को ही अपनी नियति मानकर सिस्टम के सामने घुटने टेक चुका है। एसएसपी ने मामले का संज्ञान लिया तो शनिवार को पुलिस हरकत में आई और पीड़ित के घर तक पहुंची थी। आरोपित को थाने बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। इंस्पेक्टर मनोज ने बताया कि वीआईपी ड्यूटी की वजह से पुलिस आरोपित तक नहीं पहुंच पाई है। जल्द ही न्याय दिलाया जाएगा।
साधुशरण को न्याय कब मिलेगा?
आरोपी पकड़े जाएंगे या जांच में खेल हो गया है, यह तो राम जाने या पुलिस । मगर, इतना साफ है कि न्याय देने की इस ढ़ीली प्रक्रिया ने ही साधुशरण की हिम्मत को तोड़ दिया था। बिना न्याय पाए ही उनकी मौत हो गई और अब परिवार वाले भी आस छोड़ ही चुके हैं।
दो विवेचक बदले पर जांच पूरी नहीं
मामले की जांच कर रहे विवेचक संजय सिंह चार्जशीट लगाने का दावा करते-करते स्थानांतरण के बाद कहीं और चले गए। अब अरविंद राय को विवेचना सौंपी गई है। करीब छह महीने से उनको जांच मिली है, लेकिन न तो गिरफ्तारी हुई और न ही चार्जशीट दाखिल हुई।