नियम-मानक दरकिनार करके सहजनवां रेंज में तैनात महिला वनकर्मी की मां, बहन और भाई ने भी 16,500 पौधे लगवा डाले हैं। इसका पर्दाफाश सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) से हुआ है। पता चला है कि वनकर्मी के परिवार ने एक दिन में पौधा लगवाने के एवज में 74415 रुपये का भुगतान प्राप्त किया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला वन अधिकारी (डीएफओ) ने सहजनवां के रेंजर एपी सिंह को हटाकर परतावल रेंज महराजगंज से संबद्ध कर दिया है। साथ ही मामले की जांच देवरिया के डीएफओ प्रमोद गुप्ता को दी है। मुख्य वन संरक्षक दीपक कुमार ने भी माना है कि वनकर्मी के सगे-संबंधी पौधरोपण कराके विभाग से भुगतान प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
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खजनी तहसील क्षेत्र के कटघर चौक निवासी मानस उपाध्याय ने कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी गोरखपुर से 2019 के दौरान सहजनवां रेंज में पौधरोपण की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। 19 दिसंबर 2019 को गोरखपुर प्रभाग के वनाधिकारी अविनाश कुमार ने सूचना दी। इसकी प्रति मानस को नौ जनवरी को मिली है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक एचएच 28 पर दोनों तरफ चार किलोमीटर (242-246 किलोमीटर) में पौधरोपण कराने की जिम्मेदारी वनकर्मी श्रेष्ठा श्रीवास्तव की मां व टिकरिया निवासी नीलम को दी गई।
नीलम ने 5500 पौधे लगवाए और इस मद में वन विभाग से 24805 रुपये का भुगतान प्राप्त किया। इसी तरह वनकर्मी की बहन सौम्या श्रीवास्तव को मगहर पुरानी सड़क पर चकिया ढाला से आमी नदी पुल तक पौधरोपण का काम दिया गया। सौम्या ने भी 5500 पौधे लगवाए और 24805 रुपये का भुगतान लिया। वनकर्मी के भाई गौरव को तेनुहारी नाला पर पौधरोपण कराने की जिम्मेदारी मिली थी। मां और बहन की तरह ही गौरव ने भी 5500 पौधे लगवाए हैं। इसके एवज में वन विभाग से 24805 रुपये का भुगतान भी प्राप्त किया है।
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और भी वन कर्मियों के सगे-संबंधियों को पौधरोपण का ठेका
आरटीआई से जो जानकारी मिली है, वह बड़ी धांधली की तरफ इशारा कर रही है। सहजनवां रेंज में ही 18 लोगों के जरिए पौधे लगवाए गए हैं। लुचुई गांव के कपिल के दो बेटे आकाश सिंह और शौर्य प्रताप सिंह ने मिलकर 11,000 पौधे लगवाए। साथ ही 29 हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान लिया। लुचुई गांव की ऊषा सिंह, माया सिंह, आकाश कुमार गुप्ता, अंकित कुमार गुप्ता, सूर्य प्रताप सिंह, सत्य प्रकाश सिंह और आकाश कुमार सिंह ने भी 5500-5500 पौधे लगवाकर वन विभाग से धनराशि प्राप्त की है।
एक गांव के 11 को ठेका
सहजनवां रेंज के पौधरोपण में गड़बड़ी का इशारा लुचुई गांव के 11 लोगों को ठेका दिया जाना भी कर रहा है। 18 लोगों में से 11 ठेकेदार लुचुई गांव के हैं। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर लोग एक वन अधिकारी के सगे-संबंधी हैं। यही नहीं, लुचुई गांव के ही देवेश गुप्ता पुत्र उमेश गुप्ता के नाम से राप्ती पुल से मस्करा मिल तक पौधरोपण कराया गया लेकिन इसके एवज का भुगतान देवेश को नहीं मिला है। पौधरोपण हुआ या नहीं, इसपर भी संशय है।
पति-पत्नी को पता नहीं, बन गए ठेकेदार
आरटीआई के तहत जानकारी प्राप्त करने वाले मानस उपाध्याय और उनकी पत्नी साधना को पता नहीं था लेकिन वे दोनों भी वन विभाग के ठेकेदार हैं। इसका पर्दाफाश भी आरटीआई से हुआ है। इससे पता चला कि मानस ने बलुआ मंझरिया मठ भूमि पर 5500 पौधे लगवाए और इसके एवज में 24805 रुपये भुगतान प्राप्त किया।
मानस की पत्नी साधना ने जैतपुर ईदगाह से बनौड़ा मार्ग तक 5500 पौधे लगवाकर 24805 रुपये प्राप्त किए। हालांकि मानस का आरोप है कि पौधरोपण में धांधली की गई है। पहले सगे-संबंधियों के बैंक एकाउंट में धनराशि मंगाई गई, फिर दबाव डालकर निकलवाई गई। जहां पौधे लगवाने का जिक्र है, वहां पौधे नहीं है। इसकी जांच पहले गोरखपुर के वन अधिकारी ने की थी, अब जांच देवरिया के डीएफओ को मिली है।
मुख्य वन संरक्षक दीपक कुमार ने कहा कि वन कर्मी के परिजन पौधरोपण नहीं करा सकते हैं। किसी व्यक्ति को ठेका नहीं दिया जा सकता है। जो फर्म जीएसटी जमा करती है, उसे ठेका दिया जाता है। पौधरोपण करने वाले श्रमिकों के बैंक अकाउंट में मेहनताना भेजा जाता है। यह मामला गंभीर है।
जिला वन अधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि रेंजर एपी सिंह को सहजनवां से हटाकर परतावल रेंज से संबद्ध कर दिया गया, उन्हें रेंजर का कार्यभार नहीं दिया गया है। वन कर्मी के परिजन से पौधरोपण कराने और गड़बड़ी के मामलों की जांच देवरिया के जिला वन अधिकारी को दी गई है। निष्पक्ष रूप से जांच होगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फील्ड इंचार्ज, रेंजर या फिर प्रभारी अपने सगे-संबंधी के नाम पर कोई काम नहीं करा सकता है।
रेंजर एपी सिंह ने कहा कि कर्मचारी खुद नहीं लगवा सकता है लेकिन कर्मचारी के घरवाले दूसरी जगह काम करा सकते हैं। इसपर किसी तरह की रोक नहीं है। छोटे-छोटे काम जिला वन अधिकारी की स्वीकृति से दिए जाते हैं। इन मामलों में भी ऐसा ही हुआ। जिला वन अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही ठेके पर काम कराया गया है। इसमें नियम, मानक का अनुपालन किया गया।
सहजनवां रेंज वन कर्मी श्रेष्ठा श्रीवास्तव ने कहा कि एक दिन में पौधे लगवाने थे, इसलिए अलग-अलग लोगों को ठेका दिया गया था। लक्ष्य तय था लेकिन श्रमिक नहीं मिल रहे थे। वन विभाग ने पौधरोपण के लिए मांगपत्र लिया था। मां, बहन और भाई ने भी मांगपत्र दिया और काम मिल गया। काम ऐसा था, जो दूसरों से कराना था।