समाज बनाने का काम करता है संघ : भागवत
आरएसएस प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने कहा कि संघ समाज बनाने का काम करता है, इसलिए धर्म भी है। उन्होंने कहा कि हम संघ के कार्यकर्ता के घर से हैं, इसलिए व्रतस्थ हैं। यह व्रत परिवार के किसी अकेले व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का होता है। संघ की अपनी कुलरीति है।
सर संघचालक मोहन भागवत मंगलवार देर रात बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित संघ के पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि संघ पर दो बार प्रतिबंध लगा था, लेकिन किसी स्वयंसेवक ने माफी नहीं मांगी। इसके पीछे पारिवारिक शक्ति रही। स्वयंसेवकों के साथ परिवार खड़ा रहा। परिवार सदा अड़ा रहा, इसलिए संघ का काम निरंतर चल रहा है। स्वयंसेवकों के परिजनों को संघ के बारे में जानना चाहिए। संघ का काम गंभीर है। हम सौभाग्यशाली हैं कि इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। यह हर स्वयंसेवक को समझना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख के साथ मंच पर प्रांत संघचालक डॉ पृथ्वीराज सिंह व सह संघचालक डॉ महेंद्र अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग कार्यवाह आत्मा सिंह व डॉ आशीष श्रीवास्तव ने किया। अखिल भारतीय सह व्यवस्था अनिल ओक, गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष, क्षेत्र प्रचारक अनिल, क्षेत्र सेवा प्रमुख नवल, प्रांत प्रचारक सुभाष, सह प्रांत प्रचारक अजय, प्रांत संपर्क प्रमुख प्रो संजीत गुप्त, सह व्यवस्था प्रमुख हरे कृष्ण, विद्या भारती के संगठन मंत्री रामय, विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री आनंद गौरव, भाग बौद्धिक प्रमुख संकर्षण त्रिपाठी, प्रचार प्रमुख उपेंद्र प्रसाद द्विवेदी व पुनीत पांडेय मौजूद रहे।
परंपरागत वेश-भूषा में रहना जरूरी
आरएसएस प्रमुख ने मणिपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने परंपरागत वेश-भूषा में रहना चाहिए। मंगल प्रसंग व अवसरों पर तो वेश-भूषा में ही रहना चाहिए। हम क्या हैं? हमारे माता-पिता कहां से आए, इसकी जानकारी रखनी चाहिए। इसकी भी चिंता करनी चाहिए कि अपने पूर्वजों के रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हमें परिवार के साथ बैठकर विचार करना चाहिए। बच्चों से खुले दिल से बात करनी चाहिए। यह भी सोचना चाहिए कि समाज के लिए क्या कर सकते हैं?
होली-चैता गीत का रंग जमा
सांस्कृतिक कार्यक्रम में संस्कार भारती के कलाकारों ने भजन प्रस्तुत किया। होली व चैता गीत का रंग जमा। विद्या भारती के विद्यार्थियों ने राम कथा की प्रस्तुति दी। दूसरी तरफ, प्रचार विभाग ने साहित्य बिक्री का स्टॉल लगाया। इसमें संघ साहित्य व चित्रों को रखा गया था। परिजनों के साथ आए स्वयं सेवकों ने साहित्य व चित्रों की जमकर खरीदारी की।
अब वाराणसी में प्रवास
पारिवारिक स्नेहिल मिलन समारोह के समापन के बाद डॉ मोहन भागवत वाराणसी के लिए रवाना हो गए। गोरखपुर में वह चार दिन रहे। अब 23 से 27 मार्च तक वाराणसी में प्रवास करेंगे। काशी प्रांत के अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।