परवीन खातून कहती हैं कि उन्होंने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, इंटरव्यू के बाद यह नौकरी मिल गई। बताती हैं कि अभी वह पढ़ाई कर रही हैं और वो अध्यापक बनकर नई पीढ़ियों में शिक्षा की अलख जगाना चाहती हैं।
परवीन खातून ने बताया कि उनकी ड्यूटी बस्ती से सिद्धार्थनगर जाने वाली बस में लगाया गया, जब वे बस में टिकट- टिकट करते हुए यात्रियों के पास गईं, तो सब बड़ी हैरत भरी नजरों से देख रहे थे। कुछ महिलाएं तो अपनी बेटियों को इशारा कर यह कह रहीं थीं कि देखो यह भी एक बेटी है।
परवीन खातून बताती हैं कि जो मानदेय मिलता है, उसे वह अपनी पढ़ाई पर खर्च तो करती हैं, इसके साथ ही घर में अम्मी अब्बू की भी मदद करती हैं। कहती हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है, पराश्रित का मतलब पराधीनता हैं, ऐसे में सभी को आत्मनिर्भर होना चाहिए। कहती हैं कि जब हम अपने पैरों पर खड़े होते हैं, उस समय हम अन्य लोगों के लिए उदाहरण बन जाते हैं।