बस्ती-गोरखपुर मंडल में भाजपा के लिए अपनी प्रतिष्ठा और विपक्ष के सामने अपना वजूद बचाने की चुनौती है। दोनों मंडलों में विधानसभा की 41 सीटें हैं। इसमें से 37 सीटों पर भाजपा व सहयोगी दलों का कब्जा है। चार सीटें विपक्ष के पास हैं। अब सबका ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजों पर रहेगा।
गोरखपुर-बस्ती मंडल का चुनाव छठवें चरण में होना है। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। साल 2017 के चुनाव में इस मंडल से भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली थी। बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर में विपक्ष का खाता नहीं खुल सका था। सभी 13 सीटें भाजपा ने जीत ली थीं। गोरखपुर मंडल के चार जिलों में विपक्ष को चार सीटें मिल सकी थीं। गोरखपुर में विधानसभा की नौ सीटें हैं।
चिल्लूपार विधानसभा सीट से बसपा के विनय शंकर तिवारी (अब सपा में आ गए) जीते थे। आठ सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इसी तरह देवरिया, महराजगंज व कुशीनगर की एक-एक सीट विपक्ष के खाते में गई थी। कुशीनगर की तमकुहीराज सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने चुनाव जीता था, लेकिन दूसरे जिलों में खाता नहीं खुल सका था।
इन जिलों की सीटें
गोरखपुर
गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, पिपराइच, कैंपियरगंज, बांसगांव (सुरक्षित), खजनी (सुरक्षित), चिल्लूपार व चौरीचौरा।
सिद्धार्थनगर
शोहरतगढ़, कपिलवस्तु (सुरक्षित), बांसी, इटवा व डुमरियागंज
बस्ती
कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर, महादेवा (सुरक्षित) व हर्रैया।
संतकबीरनगर
मेंहदावल, खलिलाबाद व धनघटा (सुरक्षित)
महराजगंज
फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महराजगंज (सुरक्षित) व पनियरा।
कुशीनगर
खड्डा, पडरौना, तमकुहीराज, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा व रामकोला (सुरक्षित)।
देवरिया
रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपाररानी, सलेमपुर (सुरक्षित) व बरहज।