एक वर्ष बाद कैंट पुलिस ने सबूत न मिलने के आधार पर मामले में फाइनल रिपोर्ट लगी दी थी, लेकिन संजीव ने एडीजी से मिलकर पुनः विवेचना का आदेश करा लिया, तब से यह मामला क्राइम ब्रांच में चल रहा है। उधर, संजीव ने भाई के नाम पर चल रहा एलआईसी फर्जी मुहर व हस्ताक्षर लगाकर 30 लाख रुपये से अधिक का क्लेम ले लिया। एक शूटर के घटना में शामिल होने व संजीव द्वारा भाई को इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई है, जिसके बाद अंदर ही अंदर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी।
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शूटर पहले संजीव के पास आता था। हत्या के बाद उसने मिलना बंद कर दिया। शुक्रवार को एसपी क्राइम संजीव व उसकी पत्नी से मकान पर फर्जी लोन, रिश्तेदारी की बहन से संबंध सहित पूरी जानकारी ली। एसपी ने करीब 10 पड़ोसियों से भी घटना के समय व उसके बाद कि स्थिति के बारे में पूछताछ कर जानकारी ली।
इस संबंध में एसपी क्राइम इंदु प्रभा ने कहा कि जांच की जा रही है। हर बिंदु पर बारीकी से पूछताछ हुई है। सबूत जुटाए गए हैं। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।