भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के प्रतीक का पर्व रक्षाबंधन 22 अगस्त रविवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन ग्रह एवं नक्षत्रों का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन घनिष्ठा नक्षत्र के साथ ही शोभन योग है। शोभन योग से शुभता में वृद्धि होगी। बताया कि इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान शाम पांच बजकर एक मिनट तक एवं धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि आठ बजकर 25 मिनट तक है। चंद्रमा कुंभ राशि में होंगे।
नहीं रहेगी भद्रा, पूरे दिन बंधेगी राखी
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्ध में भद्रा होती है। लेकिन इस वर्ष पहले दिन यानी 21 अगस्त के शाम छह बजकर 10 मिनट से ही से पूर्णिमा लग जा रही है। इसके साथ ही भद्राकाल की शुरुआत भी हो जाएगी। भद्रा 22 अगस्त के सुबह पांच बजकर 35 मिनट तक रहेगी। सुबह पांच बजकर 35 मिनट से शाम चार बजकर 30 मिनट के बीच कभी भी राखी बांधी जा सकती है।
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रक्षाबंधन 2021
- फोटो : अमर उजाला।
ऐसे बांधे राखी
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूरब दिशा में और बहन का पश्चिम दिशा में होना उत्तम माना जाता है। बहनें रोली, चंदन, अक्षत, दही का टीका अपने भाई को लगाएं, इसके बाद कपूर, अगरबत्ती या घी के दीपक से आरती उतारे, उसके बाद मिष्ठान खिलाकर भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधती बांधे।
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राखी बांधते समय पढ़ें यह मंत्र
राखी बांधते समय बहनों को यह मंत्र पढ़ना चाहिए ताकि इसका शुभ परिणाम मिल सके। यह रक्षा सूत्र: अगर राखी बांधते समय बहनें रक्षा सूत्र पढ़ती हैं तो यह बेहद ही शुभ होता है। इस रक्षा सूत्र का वर्णन महाभारत में भी आता है। ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
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ये है पौराणिक कथा
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, महाभारत में शिशुपाल वध के समय सुदर्शन चक्र धारण करते समय भगवान कृष्ण की उंगली कट गई थी।
द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली में बांध दिया था। माना जाता है कि यह घटना सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को हुई थी। मान्यता है कि इस घटना के बाद से ही राखी का पर्व मनाया जाने लगा।