जानकारी के मुताबिक, 18 नवंबर को घर से राजू अपने पड़ोसी दोस्त के साथ साइकिल से निकला था। इसके बाद वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने दोस्त पर ही अपहरण का केस दर्ज कराया। इसी बीच रविवार को उसका शव गांव के सिवान पर बने शवदाह गृह के पास मिल गया।
इससे के पूर्व दोस्त ने पुलिस को यह बताया था कि घर से निकले के बाद वह राजू से अलग हो गया था, लेकिन शव मिलते ही वह डर कर भाग भी गया। यही वजह है कि पुलिस अब उसे बुला ली है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इलाके की किसी किशोरी से राजू की बातचीत होती थी।
अब संदेह यही है कि उसी से मिलने के दौरान वारदात की गई होगी। फिलहाल, पुलिस इस पूरे केस में कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है। पुलिस जांच कर एक-एक कड़ी जोड़ रही है, ताकि घटना का पर्दाफाश हो सके।
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यह हुआ था
पिपराइच इलाके के बसंतपुर गांव निवासी संजय कुमार का बेटा राजू 18 नवंबर को घर से निकला था। वह घर से गांव के ही अर्जुन निषाद के बेटे के साथ साइकिल पर जाते हुए देखा गया था। देर शाम अर्जुन का बेटा तो वापस आ गया। लेकिन राजू नहीं लौटा। परिवार के लोगों ने उसके मोबाइल पर फोन करना शुरू किया तो उसका मोबाइल भी बंद मिला। इसके बाद रविवार को गांव के सिवान में शवदाह गृह के पास उसका क्षत विक्षत शव मिला। सिर गायब था और जबड़ा दूर पड़ा था। अब पोस्टमार्टम से साफ हो गया है कि जहर से मौत हुई है, यानी शव को ठिकाने लगाने के लिए फेंका गया था।
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एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस को सोशल मीडिया से कुछ चैट मिले हैं। नामजद आरोपी बनाए गए दोस्त को भी बुलाया गया है। उससे पूछताछ के बाद बहुत से तथ्य साफ हो जाएंगे। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही घटना का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।