फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोरखपुर में राष्ट्रपति: भूमिपूजन कर महामहिम ने रखी विश्वविद्यालय की नींव, बोले- मील का पत्थर साबित होगा आयुष

Sat, 28 Aug 2021 05:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

भूमि पूजन कर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रखी महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला, बोले- कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में आयुष की महत्वपूर्ण  भूमिका
 
विज्ञापन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। - फोटो : @rashtrapatibhvn/Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि विश्व को योग, आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा भारत की देन है। भगवान धन्वंतरि को जहां आयुर्वेद का जनक माना जाता है, वहीं ऋषि अगस्त्य को सिद्ध चिकित्सा के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। आदिवासी समाज में जड़ी-बूटियों और वन औषधियों के ज्ञान की समृद्ध परंपरा रही है। मगर पिछले दो दशकों में पूरे देश में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता में बहुत बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के खिलाफ लड़ाई में आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने लोगों की इम्यूनिटी बढ़ाने तथा उन्हें संक्रमण से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विज्ञापन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को गोरखपुर के भटहट ब्लॉक के पिपरी गांव में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास के साथ ही भूमि पूजन कर आधारशिला रखी है। यह उत्तर प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय होगा। इस दौरान राष्ट्रपति की धर्मपत्नी  व राष्ट्र की प्रथम महिला सविता कोविंद, उनकी पुत्री स्वाती कोविंद, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। शिलान्यास समारोह के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि  गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना से ‘आयुष’ पद्धतियों की शिक्षा एवं लोकप्रियता को और बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में, वैदिक काल से ही ‘आरोग्य’ पर विशेष बल दिया जाता रहा है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी आरोग्य की महत्ता का वर्णन है। कहा भी गया है कि  शरीर ही समस्त कर्तव्यों को पूरा करने का प्रथम साधन है इसलिए शरीर को स्वस्थ रखना बेहद आवश्यक है। सभी का शरीर निरोगी रहे।  स्वस्थ रहे, इसी उद्देश्य को फलीभूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने के लिए ‘महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय’ की स्थापना की जा रही है। शिलान्यास समारोह में आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी, सांसद रवि किशन, विधायक पिपराइच महेंद्र पाल सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी, डीएम विजय किरन आनंद समेत कई जनप्रतिनिध व अधिकारी मौजूद रहे।

विज्ञापन

आयुष के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही भारत सरकार

राष्ट्रपति ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भारत में अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित रही हैं। भारत सरकार ने आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी,सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘आयुष’ के नाम से जाना जाता है, के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इन चिकित्सा पद्धतियों की व्यवस्थित शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत सरकार ने, वर्ष 2014 में ‘आयुष’ मंत्रालय का गठन किया था।

शोध संस्थान भी बनेगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वर्ष 2017 में आयुष विभाग की स्थापना की थी और अब, राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने का सराहनीय निर्णय लिया है। विश्वास है कि इस विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर प्रदेश के आयुष चिकित्सा संस्थान अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकेंगे। पारंपरिक एवं प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की विश्वसनीयता एवं स्वीकार्यता को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित किए जाने और जन-स्वास्थ्य में योग की उपयोगिता को देखते हुए, एक शोध संस्थान की स्थापना भी इस विश्वविद्यालय में की जाएगी। इसका भी लाभ लोगों को मिलेगा।

देश में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का विकास नाथों-सिद्धों ने किया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही अनेक चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित रही हैं। देश में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का विकास नाथों एवं सिद्धों द्वारा किया गया। आज के समय में यह पद्धति, दक्षिण भारत में अधिक लोकप्रिय है। खनिजों और धातुओं को औषधि रूप में तैयार करके, इमरजेंसी मेडिसिन के रूप में इनके प्रयोग के प्रवर्तकों में बाबा गोरखनाथ प्रमुख रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे आयुष विश्वविद्यालय का नाम महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय रखा जाना पूरी तरह से सही है।
 

कबीर और तुलसीदास भी थे गुरु गोरखनाथ से प्रभावित

राष्ट्रपति ने कहा कि गुरु गोरखनाथ ने सदाचरण, ईमानदारी, कथनी व करनी के मेल और बाह्य आडंबरों से मुक्ति की शिक्षा दी। योग को उन्होंने ‘दया दान का मूल’ कहा। उनके चरित्र, व्यक्तित्व एवं योग सिद्धि से संतकबीर इतने प्रभावित थे कि उन्होंने गुरु गोरखनाथ को ‘कलिकाल में अमर’ कहकर उनकी प्रशस्ति की।

गोस्वामी तुलसीदास ने भी योग के क्षेत्र में गुरु गोरखनाथ की प्रतिष्ठा स्वीकार करते हुए कहा कि  गोरख जगायो जोग’ अर्थात गुरु गोरखनाथ ने जन-साधारण में योग का अभूतपूर्व प्रसार किया। उन्होंने कहा कि भारत में योग मार्ग उतना ही प्राचीन है जितनी प्राचीन, भारतीय संस्कृति है। योग को प्रतिष्ठित करने वाले गुरु गोरखनाथ निश्चय ही अत्यंत महिमामय, अलौकिक प्रतिभा संपन्न, युगद्रष्टा महापुरुष थे, जिन्होंने समस्त भारतीय तत्व चिंतन को आत्मसात करके साधना के एक अत्यंत निर्मल मार्ग का प्रवर्तन किया।

विविधताओं में एकता का उत्तम उदाहरण है भारत
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतवर्ष, विविधताओं में एकता का उत्तम उदाहरण है। जो कुछ भी लोकोपयोगी है, कल्याणकारी है, सहज उपलब्ध और सुगम है, उसे अपनाने में भारतवासी संकोच नहीं करते। देश में विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का प्रचलन भी हमारी इसी सोच का परिणाम है।

 
विज्ञापन

योग से आरोग्य के साथ सकारात्मक ऊर्जा

राष्ट्रपति ने कहा कि ऋग्वेद के समय से योग का जुड़ाव भारत के जन-मानस के साथ रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मिले पुरावशेषों से भी प्रमाणित हुआ है कि योग हमारी जीवन शैली का अंग रहा है। वर्तमान में, योग की लोकप्रियता एवं महत्ता सभी को मालूम है। योग को जीवन में उतार लेने पर व्यक्ति आरोग्य के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है । मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक तौर पर मजबूत बनता है। तनाव और चिंता से भरे आधुनिक समय में मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य का मार्ग, योग से उपलब्ध होता है।

राष्ट्रपति भवन परिसर में विकसित किया जा रहा आरोग्य वन
राष्ट्रपति ने कहा कि समेकित चिकित्सा पद्धति का विचार पूरी दुनिया में मान्य हो रहा है। अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां एक दूसरे की पूरक प्रणाली के रूप में लोगों को आरोग्य प्रदान करने में सहायक हो रही हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में एलोपैथिक चिकित्सा क्लीनिक के साथ-साथ आयुष आरोग्य केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध है। आरोग्य वन विकसित करने का काम शुरू किया गया है।

प्राकृतिक चिकित्सा के जोरदार पक्षधर थे महात्मा गांधी
राष्ट्रपति ने मंच से ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया और कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति, विशेष तौर पर प्राकृतिक चिकित्सा की बात हो, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र करना  स्वाभाविक है। वे प्राकृतिक चिकित्सा के प्रबल पक्षधर थे और कहा करते थे कि शारीरिक उपचार के साधन, हमारी प्रकृति में ही मौजूद हैं। वे इस बात से बहुत व्यथित रहते थे कि आधुनिक शिक्षा का संबंध हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन के साथ नहीं है। विद्यार्थियों को अपने गांव और खेतों के बारे में ज्ञान नहीं होता।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें