महामहिम के हाथों सम्मानित होतीं डॉ. नीरजा माधव।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति भवन में नारी शक्ति पुरस्कार 2020-21 दिया गया। तिब्बती शरणार्थियों और ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं को लेखन के जरिए इंगित कर समाज को जागरूक किया।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आकाशवाणी गोरखपुर की निदेशक डॉ. नीरजा माधव को नारी शक्ति पुरस्कार 2020-21 से सम्मानित किया। उन्हें ट्रांसजेंडरों और तिब्बती शरणार्थियों पर विशेष लेखन कार्य करने के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।
आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक सर्वेश दुबे ने बताया कि डॉ. नीरजा माधव ने तिब्बती शरणार्थियों, उनकी अहिंसावादी मुक्ति साधना और भारत-चीन सीमा विवाद पर उपन्यायस 'गेशे जंपा, देनपा: तिब्बत की डायरी' और एक द्विभाषी कविता 'फ्री टिबेट' लिखी है। उनका उपन्यास गेशे जंपा तिब्बती विश्वविद्यालय सारनाथ (वाराणसी) के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
ट्रांसजेंडर की समस्याओं को उकेरने वाले उपन्यास 'यमदीप', 'किन्नर नहीं' और 'हिजड़ा समुदाय' लिखे हैं। इन उपन्यास के माध्यम से उन्होंने इस समुदाय की दुश्वारियां समाज के सामने मार्मिक ढंग से पेश कीं। उन्होंने 2002 में ही थर्ड जेंडर के लिए आरक्षण और मानवाधिकारों की मांग उठाई।
2014 में उच्चतम न्यायालय ने थर्ड जेंडर को वह सभी अधिकार प्रदान किए जिनकी मांग नीरजा माधव ने अपने उपन्यास के जरिए की थी। उनके इस लेखन संघर्ष को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सामाजिक क्रांति के प्रयास के रूप में मान्यता दी और उन्हें नारी शक्ति सम्मान पुरस्कार के लिए चुना गया।
राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को समारोहपूर्वक कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। निदेशक को सम्मान मिलने पर आकाशवाणी गोरखपुर के सभी कर्मचारियों में हर्ष व्याप्त है।