गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2027-28 से फॉरेंसिक साइंस की भी पढ़ाई होगी। स्नातक और परास्नातक दोनों में यह कोर्स शुरू करने की तैयारी है। इसे लेकर खाका तैयार किया जा रहा है।
वर्तमान दौर में अपराध जांच, साइबर क्राइम, डीएनए विश्लेषण और न्यायिक प्रक्रियाओं में फाॅरेंसिक साइंस की उपयोगिता बढ़ गई है। इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। पाठ्यक्रम की रूपरेखा, संसाधनों और आवश्यक ढांचे का प्रारूप तैयार करने के बाद इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इस संबंध में विस्तृत योजना बनाने की जिम्मेदारी अधिष्ठाता विज्ञान संकाय को दी गई है।
बताया जा रहा है कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग को फिलहाल इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग के नेतृत्व में ही प्रयोगशाला, उपकरण व विशेषज्ञ संकाय की व्यवस्था की जाएगी। पाठ्यक्रम विकसित होने के बाद फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी। यानी इसके लिए अलग संकाय बनेगा।
डीडीयू प्रशासन का मानना है कि इस कोर्स के शुरू होने से गोरखपुर में फॉरेंसिक एजुकेशन का एक मजबूत केंद्र विकसित होगा। छात्रों को इस कोर्स के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। अब स्थानीय के साथ ही दूसरे क्षेत्र के विद्यार्थी भी यहां आएंगे। इससे विभिन्न विभागों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि वर्तमान दौर में फाॅरेंसिक साइंस के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। ऐसे पाठ्यक्रमों से रोजगार और शोध के भी अवसर विकसित होंगे। वर्ष 2027 से इस कोर्स के संचालन की योजना है। यूजी और पीजी में एक साथ कोर्स संचालन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।