गोरखपुर शहर में नौ वर्ष पहले खुला फिलेटली ब्यूरो सोमवार से बंद हो गया। सूबे में ऐसे कुल पांच प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली ब्यूरो बंद किए जाएंगे। खिचड़ी मेले पर चौरीचौरा के 100 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में इसी ब्यूरो के जरिये विशेष डाक टिकट जारी किया गया था। टिकट पर गुरु गोरक्षनाथ मंदिर का आवरण कवर भी जारी हुआ था। इसके अलावा अन्य प्रमुख कवर व डाक टिकट जारी किए जा चुके हैं।
ब्यूरो के बंद हो जाने से शहर के फिलेटली से जुड़े लोगों में काफी निराशा है। डाक टिकटों का संग्रह और अध्ययन फिलेटली कहलाता है। शहर के गोलघर प्रधान डाकघर में फिलेटली ब्यूरो खुला था। इसके खुलने से लोगों को सहूलियत थी कि वे विभिन्न मौकों पर जारी किए गए उन डाक-टिकटों को भी देख सकते थे और संग्रहित कर सकते थे जो अक्सर देखने को नहीं मिलते।
अहम घटनाओं, विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों, प्रकृति के पहलुओं, सुंदर या विलुप्तप्राय पेड़-पौधों, पर्यावरणीय मुद्दों, कृषि के कार्यकलापों, राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय मामलों, खेलों, धार्मिक अवसरों आदि के स्मरण में जारी किए जाते हैं। ये डाक-टिकट केवल फिलेटली ब्यूरो और काउंटरों में या फिलेटली जमा खाता स्कीम के तहत मिलते हैं। इनका मुद्रण सीमित मात्रा में होता है। ऐसे में इन डाक टिकटों के जारी होने पर फिलेटली के जानकार या सामान्य लोग स्थानीय स्तर पर जमा खाता स्कीम के तहत इनकी खरीदारी कर सकते हैं।
ब्यूरो के बंद हो जाने के बाद अब लखनऊ या प्रदेश के अन्य ब्यूरो पर ही विशेष डाक टिकटों को खरीदा जा सकेगा। प्रमुख फिलेटलीविद संदीप चौरसिया ने बताया कि काफी प्रयास के बाद इसे गोरखपुर में खुलवाया जा सका था। लेकिन, अब इसके बंद होने से डाक विभाग को भी आर्थिक क्षति होगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर के अलावा अन्य बाहर से कहीं पर भी इस सेवा का लाभ लेने में इतनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है कि लोग थक-हार जाते हैं।
प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि फिलेटली ब्यूरो को बंद किए जाने का फैसला निदेशालय (डायरेक्टरेट) से हुआ है। इसे क्यों बंद किया जा रहा, इसकी कोई जानकारी नहीं है।