अब जांच का दायरा जितना बढ़ा रहा है, उतना बड़ा खेल भी सामने आ रहा है, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट पर प्रशासन की ओर से हो रही देरी इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। इसे लेकर पुलिस अफसर अब डीएम से सीधे वार्ता करने की तैयारी में है, ताकि जांच को आगे बढ़ाकर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाए।
आईटीआई कॉलेज के बारे में यह भी सामने आया है कि सीलिंग की जमीन पर बना है। इतना ही नहीं पुलिस की जांच में आया है कि 2016 में कमलेश पर कुशीनगर के लोगों ने गोली भी चलाई थी। उस समय उसे गोली लगी थी और वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ था, लेकिन तहरीर कमलेश ने दिया नहीं है और फिर दबाव में उसने रुपया भी वापस किया था। अब इस बिंदु पर भी पुलिस जांच कर रही है।
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सीलिंग की जमीन का बैनामा तो फिर भी संभव है, लेकिन उसका खारिज-दाखिल हो जाना बिना कर्मचारियों के संभव नहीं है। तहसील के कर्मचारी और अफसर से गहरी सांठगांठ की वजह से कमलेश करोड़पति बन गया लेकिन आम लोग ठगे गए हैं। हालात यह है कि जिन लोगों की जमीन का खारिज दाखिल हो गया है वह सीलिंग की जमीन को अपना समझकर उस पर अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर मकान भी बनवा चुके हैं।
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अब जब उन्हें यह पता चल रहा है कि वह सीलिंग की जमीन है तो उनका सुख-चैन उड़ गया है। वह पुलिस के पास आ रहे हैं और एक के बाद एक पुलिस केस दर्ज कर ले रही है, लेकिन असल बात तो यह है कि जब तक इस पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी। राजस्व विभाग खुद जांच नहीं करेगा, इंसाफ मिल पाना मुश्किल है।