कुछ घंटों के बाद संबंधित व्यक्ति का फिर फोन आया और उसने एडीएम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सूचना दी कि कैसे तमाम तरह की मशक्कत के बाद पुलिस उसे अपने ही प्रांत में एंट्री करने दी। इस तरह की दिक्कत से सिर्फ आंध्र प्रदेश ही नहीं पंजाब, दिल्ली, बिहार, कर्नाटक, गुजरात जाने वालों के साथ ही साथ बाहर से गोरखपुर आने वालों भी रूबरू हो रहे हैं।
गगहा, बड़हलगंज, जंगल कौड़िया, पिपरौली आदि ब्लाकों में तो सरकार के निर्देश के बाद भी गांव वाले ही प्रवेश नहीं करने दे रहे। कोई बाहर ही अस्थायी छप्पर डालकर क्वांरटीन है तो कोई गांव के बाहर स्कूल और बगीचे में।
जिले में अब भी करीब 4500 लोग ऐसे फंसे हैं जो दूसरे प्रांतों से हैं। यह सिर्फ वह संख्या है जिन लोगों ने खुद प्रशासन को जानकारी दी है। तमाम लोगों के बारे में तो अभी प्रशासन के पास जानकारी ही नहीं है।
एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह ने बताया कि जो भी लोग दूसरे प्रांतों या प्रदेश के भीतर ही दूसरे जिलों के हैं। वे अगर अपने घर जाना चाहते हैं और उन्हें हाल-फिलहाल में वापस नहीं आना है तो ऐसे सभी लोगों को पास जारी किए जा रहे हैं। प्रशासन के पास ऐसे 4500 लोगों ने सूचना दी है। सभी को फोन कर पास बनवाने और घर लौटने की सूचना दी जा रही है।
गोरखपुर के 31 हजार लोग बाहर फंसे
दिल्ली, महाराष्ट्र व गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों में फंसे करीब 31500 लोगों ने घर वापसी के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। इन लोगों ने जिला प्रशासन के पोर्टल
wecaregorakhpur.in पर घर वापसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है।
प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक सर्वाधिक लोग महाराष्ट्र में फंसे हैं जबकि इसके बाद दिल्ली व गुजरात का नंबर आता है। बाहर फंसे लोगों वापस बुलाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में बाहर फंसे लोग भोजन आदि नहीं मिलने की समस्या भी बता रहे हैं जिसका निस्तारण भी जिला प्रशासन संबंधित जनपदों के कंट्रोल रूम में बात कर, करा रहा है।