मरीज-माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत हो गया है कि शहर के कई मोहल्लों में चल रहे नर्सिंग होम और ट्रामा सेंटर में बिना किसी सुविधा के ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। मामला तब सामने आता है, जब इलाज में कमी के चलते किसी की जान चली जाती है।
पिछले दिनों जिस ईशू अस्पताल को सील किया है, उसे भी ट्रामा सेंटर बताकर मरीजों को भर्ती किया गया था। मेडिकल कॉलेज रोड पर सील किए गए एक अवैध अस्पताल पर आईसीयू सुविधायुक्त का बोर्ड लगा था। अचरज की बात तो यह है कि सारी हकीकत सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने अभी शहर में चल रहे अवैध नर्सिंग होम व अवैध ट्रामा सेंटर की छानबीन के लिए अभियान तक शुरू नहीं किया। ऐसे अस्पतालों की पड़ताल की गई।
मेडिकल कॉलेज रोड व उसके आसपास का इलाका मेडिकल हब बन चुका है। हर गली में यहां कोई न कोई अस्पताल संचालित है। इस रोड पर मेडिकल कॉलेज से करीब आधा किलोमीटर पहले सड़क के दाईं तरफ एक अस्पताल संचालित है। आईसीयू और ट्रामा सेंटर की सुविधा युक्त इस अस्पताल में अपना कोई डॉक्टर ही नहीं है। इस अस्पताल का संचालनकर्ता ऐसा व्यक्ति है जो पहले एक अस्पताल की पैथालॉजी में काम करता था।
मेडिकल कॉलेज से गुलरिहा के बीच संचालित एक अस्पताल में दो डॉक्टर पहले ऑनकॉल जाते थे, लेकिन अब भी उन्हीं के नाम पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। शहर के भीतर तिवारीपुर इलाके में भी एक अस्पताल इसी तरह से संचालित हो रहा है।
सुविधा अधिक होने के चलते महंगा होता है ट्रामा सेंटर में इलाज
सड़क हादसों या अन्य चोट की स्थिति में ट्रामा सेंटर में ही बेहतर इलाज की सुविधा होती है। क्योंकि ट्रामा सेंटर में आर्थोपैडिक सर्जन और न्यूरो सर्जन की सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा एनेस्थेटिक, रक्त आपूर्ति, ऑक्सीजन आपूर्ति और अपने एंबुलेंस की सुविधाएं भी होती हैं।
एक तरह से मरीजों की जीवन रक्षा के लिए जरूरी उपकरण व दवाएं इस अस्पताल की खासियत होती है। इसीलिए ट्रामा सेंटर में इलाज का खर्च अन्य जगहों के मुकाबले अधिक भी होता है, लेकिन यह सुविधा केवल शहर के चुनिंदा अस्पताल में ही उपलब्ध है।
शहर में संचालित कई नर्सिंग होम ट्रामा सेंटर का दावा तो करते हैं, लेकिन उनके पास उस स्तर की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। फिर भी मरीजों को भर्ती कर उनसे इलाज के खर्च के नाम पर मोटी रकम वसूल कर रहे हैं।