यात्री अपनी सीट के लिए दौड़ पड़े। हर कोच में ऐसे भी यात्री थे, जिन्हें गोरखपुर स्टेशन उतरना था। इसके चलते तीन से चार मिनट तक धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी। इस ट्रेन के तुरंत बाद ही शाम करीब चार बजे सहरसा से अंबाला कैंट जा रही स्पेशल ट्रेन 04525 आ गई। प्लेटफार्म नंबर दो से गुजर रही इस ट्रेन को बिहार संपर्क क्रांति समझकर यात्री दौड़ने लगे। उस वक्त प्लेटफार्म पर मौजूद स्टेशन मैनेजर संजय शर्मा दौड़कर यात्रियों को बताने लगे, लेकिन भीड़ उनकी बात नहीं सुन रही थी।
इसके बाद उन्हाेंने उद्घोषणा कराया कि यह ट्रेन लखनऊ नहीं बल्कि सीतापुर होकर जाएगी। यह ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर रुकी तो इसमें लखनऊ जाने के लिए चढ़े यात्री वापस प्लेटफार्म नंबर दो पर लौटे। इसके बाद आई बिहार संपर्क क्रांति में पहले से ही लोगों की भीड़ थी। इस ट्रेन के स्लीपर कोच की दशा जनरल कोच जैसी ही थी।
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गोरखधाम और एलटीटी की भीड़ को आरपीएफ ने संभाला
प्लेटफार्म नंबर नौ से चलने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस के यात्री करीब ढाई बजे ही प्लेटफार्म पर पहुंच गए थे। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए आरपीएफ जवानों ने मोर्चा संभाला। जनरल बोगी के आगे रस्सा तानकर लाइन लगवाई गई। भीड़ प्रबंधन देखने के लिए नामित अफसर मुख्य मालाभाड़ा प्रबंधक राकेश कुमार, स्टेशन डायरेक्टर जेपी सिंह, स्टेशन मैनेजर संजय शर्मा आदि भी पहुंचे। जनरल कोच में भीड़ नहीं समाई तो स्लीपर कोच में लोग चढ़ गए।
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प्लेटफार्म नंबर सात से रवाना हुई गोरखपुर एलटीटी के सामने भी भीड़ नजर आई। यहां भी आरपीएफ इंस्पेक्टर दशरथ प्रसाद की अगुवाई में आरपीएफ जवान भीड़ नियंत्रण में लगे रहे। शाम करीब पौने सात बजे आई सप्तक्रांति एक्सप्रेस में भी भीड़ नजर आई।