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शिक्षकों की मौत की कहानी: उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार, कोरोना ने लील ली 18 जिंदगियां, बेसहारा हुए बच्चे

Mon, 31 May 2021 04:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर।

सार

अपनों के सपनों को पूरा करते खुद सपना बन चुके 18 शिक्षक। दिवंगत कई शिक्षकों के बच्चे बेसहारा हुए, दुखों का पहाड़ टूटा।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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शिक्षकों की मौत की कहानीं आस़ुओं से लिखी गई है। कोरोना काल में कुछ बच्चे अनाथ हो गए तो कुछ के सिर से मां या पिता का साया उठ गया। सिद्धार्थनगर जिले में कुल 18 शिक्षक अकाल मृत्यु की भेंट चढ़कर काल के गाल में समा चुके हैं। चंद दिनों में अपने इतने साथियों को गंवा चुके बेसिक शिक्षा परिवार में शोक की लहर है ही, सभी दिवंगत शिक्षकों के अपने मूल परिवार पर दुखों का पहाड़ ही टूट चुका है। शिक्षकों की मौत की कहानी आस़ुओं से लिखी गई है। 
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खेसरहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कड़जा में कार्यरत शिक्षक अश्विनी तिवारी प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी थे। एक वर्ष पूर्व ही इनकी पत्नी का देहांत हो चुका था। सात और दस साल की अपनी दो बेटियों को बाप और मां दोनों का प्यार, दुलार देकर पालन पोषण करने वाले अश्विनी तिवारी चुनाव प्रशिक्षण में कोरोना संक्रमित होने के बाद 21 अप्रैल को अपनी दुलारी बेटियों का साथ छोड़ गए। अश्विनी के निधन के ठीक पांच दिन बाद ही उनके सेवानिवृत्त शिक्षक पिता के निधन के बाद दोनों बेसहारा बेटियों को देखकर हर किसी की आंखें भीग उठती हैं। 

लोटन ब्लॉक के मुड़ली पननी निवासी शिक्षक रामानुज पांडेय लोटन में ही कार्यरत थे। कोरोना संक्रमण से 16 मई को दिवंगत रामानुज पांडेय के परिवार में दस वर्ष से कम की दो पुत्रियों सहित एक पुत्र हैं। गोरखपुर के मूल निवासी सुजीत कुमार श्रीवास्तव उसका ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सेखुई में कार्यरत थे। 16 अप्रैल को निधन हो गया। उनके दो पुत्र हैं। एक यूकेजी और दूसरा पांचवीं क्लास में है। अन्य दिवंगत शिक्षकों के परिवार की भी कमोबेश यही ग़म भरी दास्तां है। अपनों के सपनों को पूरा करते करते खुद सपना बन चुके हर शिक्षक की कहानी आंसुओं से लिखी है।
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पति-पत्नी की एक साथ मौत

शोहरतगढ़ ब्लॉक में कार्यरत लल्लन राम और मीना कुमारी पति-पत्नी थे। मऊ जनपद के मूल निवासी लल्लन राम अत्यंत निर्धन परिवार से थे। कड़े परिश्रम के बाद शिक्षक बने और शिक्षिका पत्नी मीना कुमारी से विवाह के पश्चात ज़िंदगी की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी तो शोहरतगढ़ के गड़ाकुल मोहल्ले में ही मकान बनवा कर रहने लगे। छोटी पुत्री एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा है। पुत्र भी पढ़ाई कर रहा है। जीवन संघर्ष में पति के साथ हर कदम साथ चलने वाली मीना कुमारी को यह आघात सहन नहीं हुआ और कोरोना के इलाज के दौरान उन्होंने भी दो दिन बाद ही आंखें मूंद ली।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने बताया कि कोरोना महामारी से आकस्मिक रूप से दिवंगत सभी शिक्षकों और शिक्षामित्रों के परिवार को बेसिक शिक्षा परिवार की ओर से हर संभव सहायता प्रदान किया जा रहा है। सरकार से इनके आश्रितों को उचित मुआवजे और मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए भी निरंतर प्रयास जारी है। फिर भी उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
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