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Doctor Advice: मर्दों में भी है कमी, केवल पत्नी ही बांझपन की दोषी नहीं

Tue, 24 May 2022 01:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि यहां आने वाले केस में 99 प्रतिशत दोष लोग महिलाओं को देते हैं। इसकी वजह से महिलाएं मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान होती हैं। जबकि, इसमें 30 से 40 फीसदी पुरुष दोषी मिलते हैं।
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सांकेतिक फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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यह दो केस तो महज बानगी है। ऐसे सैकड़ों मामले बीआरडी में हर माह आ रहे हैं। इन मामलों में 90 प्रतिशत लोग बांझपन का बड़ा कारण महिलाओं को मानते हैं। इसकी वजह से उन्हें सामाजिक रूप से शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है, लेकिन जब जांच हो रही है तो 30 से 35 फीसदी पुरुष इसकी वजह निकल रहे हैं। वैसे 30 से 40 फीसदी महिलाएं कुछ एक कमियों की वजह से गर्भवती नहीं हो पा रही हैं।

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इसके अलावा 10 से 15 फीसदी ऐसे लोग भी मिल रहे हैं, जिसका कारण पता नहीं चल पा रहा है। इन वजहों से पति और पत्नी के रिश्तें में भी तल्खी आ रही है। ऐसे मामलों को लेकर काउंसिलिंग तक भी करनी पड़ रही है। ज्यादातर पुरुष इसके बाद ही इलाज के लिए राजी हो रहे हैं।

80 फीसदी पुरुष इलाज से हो जाते हैं ठीक  

बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि यहां आने वाले केस में 99 प्रतिशत दोष लोग महिलाओं को देते हैं। इसकी वजह से महिलाएं मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान होती हैं। जबकि, इसमें 30 से 40 फीसदी पुरुष दोषी मिलते हैं। ऐसे लोगों को इलाज के लिए काफी समझाना पड़ता है। कई बार काउंसिलिंग कराने पर जब जांच की जाती है तो कमियां पुरुष में मिलती है। 80 फीसदी पुरुष इलाज के बाद ठीक हो जाते हैं। ऐसे मामलों में लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।  

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पुरुषों में होती है यह दिक्कत

डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि पुरुषों में शारीरिक अक्षमता का लेना-देना नहीं है। बल्कि, यह दिक्कत केवल शुक्राणु की कमी की वजह से होती है। शुक्राणु के वितरण मार्ग में रुकावट, जननांग में चोट लगने की वजह से कई तरह की समस्याएं, हाइड्रोसिल के ऑपरेशन के दौरान होने वाली सर्जरी में दिक्कतें, मोटापा, नशीला पदार्थ का अधिक सेवन जैसी समस्याओं की वजह से पुरुषों में यह दिक्कतें हो रही है। ऐसे में लोगों को समझाया जा रहा है कि बांझपन का कारण केवल महिलाएं नहीं हैं, बल्कि समस्याएं पुरुषों में भी हो सकती है।

केस-एक
गगहा की एक महिला शादी के सात साल बीत जाने के बाद भी गर्भवती नहीं हो रही थी। ससुराल से लेकर रिश्तेदारों तक ने ताना मारना शुरू कर दिया। इस पर किसी ने बीआरडी जाने की सलाह दी। बीआरडी में जांच हुई तो महिला में कोई कमी नहीं मिली। इसके बाद पुरुष की काउंसिलिंग कर जांच की गई तो पता चला कि शुक्राणुओं की कमी है। पति की दवा शुरू हुई तो महिला गर्भवती हो गई।

केस-दो
राजेंद्र नगर की रहने वाली महिल की शादी को 11 साल हो गए थे। कई बार जांच कराई, लेकिन जांच में रिपोर्ट हर बार सामान्य थी। इसके बाद भी महिला को बार-बार बांझपन का ताना मिलता था। इस बीच किसी ने सलाह दी कि एक बार पति की भी जांच करा लो। बीआरडी में पति की जांच हुई तो पति के शुक्राणु वितरण मार्ग में रुकावट थी। दवा शुरू हुई तो पत्नी गर्भवती हुई।


 
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