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Exclusive: सात हजार से अधिक संस्कृत के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल 83 शिक्षक तैनात

Mon, 31 Jan 2022 01:24 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।

सार

शिक्षकों की कमी, भवनों की दुर्दशा और सरकारी उपेक्षा से दम तोड़ रही संस्कृत, पांच साल में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी आई है गिरावट।
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संस्कृत विद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में सरकारी वित्तीय सहायता नहीं मिलने के कारण जिले के संस्कृत विद्यालयों की हालत बदहाल है। भवन जर्जर हैं। शिक्षकों की कमी है। हालत यह है कि जिले में सात हजार से अधिक संस्कृत के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल 83 शिक्षक तैनात हैं। इस कारण इन विद्यालयों में पिछले पांच वर्षों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या आधी रह गई है।

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जानकारी के अनुसार, जिले में संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, महाविद्यालय और पूर्व माध्यमा के विद्यालयों की संख्या 34 है। इनके लिए कुल 198 पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, लेकिन 83 शिक्षक ही तैनात हैं। 115 पद खाली हैं। इन विद्यालयों व महाविद्यालयों में सात हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ज्यादातर विद्यालयों की हालत जर्जर है। वर्ष 1991 के बाद से विद्यालयों के जीर्णोद्धार या रखरखाव के मद में शासन स्तर से धनराशि नहीं मिली है। दशकों से स्थापित संस्कृत विद्यालयों में अध्ययन और अध्यापन कैसे हो रहा है, इसकी कोई खोज-खबर लेने वाला नहीं है।

खजनी स्थित श्री सांग शामवेद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ध्रुवव्रत पांडेय का कहना है कि वर्ष 1995 से 2014 तक शिक्षकों की नियुक्ति पर शासन स्तर से रोक लगाई गई थी। साल 2014 में रोक हटी, लेकिन 2018 में फिर रोक लगा दी गई। जब रोक हटी, तब भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। शिक्षक नहीं होने की वजह से बच्चे पढ़ने नहीं आते हैं। इस तरह संस्कृत भाषा दम तोड़ती जा रही है।

 

 

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योगी सरकार ने की पहल

संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने दशकों से रिक्त पदों को मानदेय पर भरने की कवायद शुरू की है। वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 में 35 शिक्षकों को तैनात किया गया है।

इन विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा

संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कानापार कौड़ीराम, आदर्श संस्कृत महाविद्यालय रिठिया पिपराइच, महाकालिका संस्कृत महाविद्यालय सोपरा मुड़देवा, संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोहगौरा, वेद वेदांग संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय

श्री गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ दे रही संजीवनी

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संचालित गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 485 विद्यार्थी और श्री गोरखनाथ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 473 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। प्रधानाचार्य डॉ अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि नियमित कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। भवन के रखरखाव या मरम्मत के लिए धनराशि नहीं मिलती है।

सहायक अध्यापक के रिक्त पदों की स्थिति

स्तर स्वीकृत कार्यरत रिक्त
माध्यमिक स्तर 80 24 56
महाविद्यालय स्तर 78 38 40
पूर्व मध्यमा स्तर 06 05 01
प्रधानाध्यापक 34 16 18


 
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हाईकोर्ट ने भी संस्कृत से भेदभाव पर की है तल्ख टिप्पणी

हाईकोर्ट ने भी संस्कृत दुर्दशा पर तल्ख टिप्प्णी करते हुए कहा है कि संस्कृत भाषा देश की सांस्कृतिक एकता, विज्ञान और सभ्यता के विकास की आधारशिला है। इससे भेदभाव करना अपराध है। इसी प्रकार से संस्कृत पढ़ाने वाले अध्यापकों के साथ भेदभाव करना विकास की जड़ काटना है। कोर्ट ने कहा कि संस्कृत पढ़ाने वाले अध्यापकों को वेतन और पेंशन देने में भेदभाव करना राष्ट्रीय अपराध है।

डीआईओएस ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने कहा कि संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए सरकार की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था। इसे तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मानदेय पर 35 शिक्षकों को तैनात किया गया है। नियमित पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।

केस-1

उरुवा ब्लॉक के बेलाखुर्द स्थित श्री नागेश्वर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय में तीन कमरे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 50 साल पुराने विद्यालय में दो अध्यापक पढ़ाने आते हैं। विद्यार्थियों की संख्या बमुश्किल दस है। जबकि, पंजीकरण 200 से अधिक बच्चों का है। पूरा भवन जर्जर है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

केस-2

बेलघाट के श्री जगनारायण संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय छितैनी में प्रथमा से लेकर मध्यमा तक की पढ़ाई होती है। पूरा विद्यालय दो कमरों में संचालित किया जा रहा है। एक कमरा प्रधानाध्यापक का है। इसमें 129 बच्चों का पंजीकरण है। पांच अध्यापक हैं। यही स्थिति संस्कृत माध्यमिक विद्यालय ढखबा बाजार की है। इसमें चार शिक्षक हैं और पढ़ने वाले बच्चे 25 के आसपास।

केस 3

सहजनवां नगर पंचायत में श्री वैदिक धर्म संजीवनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। रानीपुर में भी एक संस्कृत महाविद्यालय है। पिपरौली ब्लॉक के बांसपार ग्राम में भी संस्कृत विद्यालय संचालित किया जा रहा है। इन विद्यालयों में पठन-पाठन के लिए शिक्षकों की संख्या न के बराबर है। बच्चों का पंजीकरण तो किया गया है, लेकिन पठन-पाठन का कार्य कागजों पर ही संचालित होता है। भवन की हालत जर्जर है।
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