जब तक कॉलोनियों को नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया जाता, तब तक सफाई का जिम्मा प्राधिकरण का होता है। सफाई कर्मियों एवं सफाई के लिए प्रयोग होने वाले उपकरणों पर खर्च करने के लिए जीडीए के पास कोई बजट नहीं होता। इसे प्राधिकरण के कोष से खर्च करना पड़ता है। इसलिए, काॅलोनियों को हस्तांतरित करने तक शुल्क लेने का प्रावधान किया जाएगा। नगर निगम को कालोनियां हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।