आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) में अब वैक्सीन का परीक्षण भी हो सकेगा। पूर्वांचल में लगने वाले बच्चों से लेकर बड़ों तक के वैक्सीन के परीक्षण के लिए नौ लैब तैयार हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि सभी लैब बीएसएल (बायोसेफ्टी लेवल) टू प्लस के बनाए गए हैं। साथ ही बीएसल थ्री लैब पर तेजी से काम भी चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर के अंत तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के हाथों इसका उद्घाटन भी हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक, अब तक वैक्सीन की क्षमता और उसके प्रभावों की जांच के लिए नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे भेजे जाते थे। इस काम में काफी समय लगता था। क्योंकि पूरे देश के वैक्सीन के प्रभाव की जांच के लिए नमूने एनआईवी पुणे भेजे जाते हैं। सही समय पर रिपोर्ट नहीं मिल पाती थी। इसके अलावा जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भी नमूने दिल्ली से लेकर पुणे, लखनऊ और बीएचयू भेजे जाते थे। इस जांच में भी एक माह से अधिक का समय लग जाता था। लेकिन नवंबर से इन सबकी जांच आरएमअरसी में शुरू हो जाएगी।
आरएमआरसी के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने बताया कि वैक्सीन का परीक्षण से लेकर कई तरह की जांच की सुविधा लैब में मिल जाएगी। नई वैक्सीन की प्रतिरोक्षक क्षमता से लेकर उसके प्रभावों का अध्ययन तक हो सकेगा। इसके अलावा जो वैक्सीन पूर्वांचल में बच्चों और बड़ों को लगाई जा रही है। उसका अध्ययन भी हो सकेगा। जीनोम सीक्वेसिंग से लेकर पूर्वांचल में नई बीमारियों की जानकारियां भी हो सकेंगी।
आरएमआरसी के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने बताया कि आरएमआरसी के नए लैब में किसी भी तरह के वैक्सीन का परीक्षण किया जा सकेगा। एंटीबॉडी से लेकर जीनोम सिक्वेसिंग तक की सुविधा नए लैब में होगी। अभी इन जांचों के लिए नमूने एनवाईवी पुणे भेजे जाते थे, जिसमें काफी समय लगता था। लैब का उद्घाटन नवंबर के अंत तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के हाथों कराने की तैयारी है।